रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

छत्तीसगढ़ की चार चिन्हारी की अवधारणा 'नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी' को सार्थक बनाने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है। वह किसानों को खुशहाल करने में लगी है, लेकिन आलम यह है कि रायपुर, सेजबहार, धमतरी, अभनपुर, सलौनी, छछानपैरी समेत खोरपा के किसान रबी फसल की बुआई नहीं कर पाए। जिले के किसानों का कहना है कि गंगरेल बांध से नहरों में पानी छोड़ने की सूचना शासन की तरफ से नहीं मिल पाई। इस कारण इस वर्ष भी रबी की बोनी नहीं हो पाई। नहर का पानी 15 दिन देरी से मिला। लगभग 1000 हेक्टेयर निर्धारित क्षेत्र में अधिकांश किसान अधिक अवधि की फसल नहीं लगा पाए। इन क्षेत्रों के खेत परती पड़े हैं। अगर समय पर पानी छोड़ा जाता तो रायपुर संभाग के लगभग 2000 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित हो जाता।

ग्रीष्मकालीन पानी देने की पहल

विभागीय अधिकारियों की मानें तो रबी के सीजन में ग्रीष्मकालीन धान को भी पानी देने की पहल पर इस बार ग्रीष्मकालीन धान को भी पानी दिया गया, जबकि इससे पहले भाजपा सरकार ने ग्रीष्मकालीन धान को पानी देने पर प्रतिबंध लगा रखा था। रबी फसल के लिए वृहत परियोजना से 61 हजार हेक्टेयर, मध्यम परियोजना से 15 हजार 541 हेक्टेयर और लघु परियोजना से 19 हजार 407 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। वहीं रबी फसल लेने से वंचित किसान कम अवधि यानी 90 दिनों के धान, मक्का, सब्जी आदि की फसल लगाएं।

बेसहारा मवेशियों से परेशान

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के बाद राजधानी समेत प्रदेश भर के किसान ग्रीष्मकालीन यानी रबी फसल की तैयारी कुछ बेसहारा मवेशियों के कारण भी नहीं कर पाए। सलौनी गांव के किसानों का कहना है कि आसपास के गांवों में लगभग रबी फसल नहीं के बराबर रही। इसके कारण पंप के पानी की सुविधा के बाद भी नहीं फसल ली गई। इसकी बड़ी वजह बेसहारा मवेशियों का आंतक है। शाम होते ही फसल लगे खेतों में चरने घुस जाते हैं, इसलिए खुला खेत छोड़ना ही ठीक लगा।

नईदुनिया ने किसानों से की बातचीत

1-मवेशियों से खेत सुरक्षित नहीं

दूसरे गांव से मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके कारण तीन एकड़ खेती होने के बावजूद रबी फसल नहीं लगाई है। -नकुल धु्रव, सलौनी

पानी की जानकारी नहीं

2-नहर के पानी छूटने की जानकारी नहीं थी। इसके कारण रबी फसल नहीं ले पाया। अगर पता होता तो ग्रीष्मकालीन धान की फसल जरूर लगाता।- कलिराम भारती, सलौनी

आसपास बुआई नहीं

3- आसपास के गांवों में रबी फसल की बुआई नहीं हुई है। अकेले फसल लेने से मवेशियों के चरने का डरता है। दिलीपकुमार, अभनपुर

कई जगह नहर जर्जर

4-नहर का पानी खेत तक नहीं पहुंच पाया। कई जगह नहरें जर्जर हैं। इसके कारण अधिक रकबे में फसल नहीं ले पाया। -कार्तिकेय डहरिया, सलौनी

वर्सन

मवेशियों के लिए गांव में गोठान बनाने की तैयारी चल रही है। कई जगह चिन्हित भी किया गया है। वही रबी से वंचित हो चुके किसान मक्का, तिवड़ा आदि फसलें लगा सकते हैं।

- गयाराम, प्रभारी, रायपुर संभाग कृषि विभाग

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