आकाश शुक्ला। रायपुर। अति कुपोषण व टीबी की बीमारी से जूझते बच्चे को शासकीय शिशु अस्पताल के चिकित्सक ने नई जिंदगी दी। चिकित्सक ने बच्चे का इलाज तो किया ही, साथ ही उस परिवार की आर्थिक मदद भी की। डाक्टर के समर्पण भाव से कुपोषित बच्चा स्वस्थ हो गया और उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

रायपुर के रावांभाठा, वार्ड क्रमांक 14, बिरगांव से एक मां सेवती निषाद अपने दो वर्ष के अति कुपोषित पुत्र दुर्गेश को लेकर आयुर्वेद अस्पताल परिसर स्थित जिला शासकीय शिशु अस्पताल आई। अस्पताल प्रभारी व शिशु रोग विशेषज्ञ डा. निलय मोझरकर ने जांच में पाया कि बच्चा अति कुपोषण का शिकार है। चलना तो दूर, शरीर का कोई अंग तक नहीं हिला पा रहा था। कंकाल की तरह होता शरीर और मस्तिष्क में टीबी होने की शिकायत सामने आई।

बच्चे की मां सेवती ने चिकित्सक को बताया कि वह रोजी-मजदूरी करती है। कुछ पैसे जोड़कर उसने निजी अस्पताल में बच्चे का इलाज कराया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। आर्थिक तंगी के चलते दवाएं तो दूर, दो रोटी के भी लाले पड़े थे। चिकित्सक ने बच्चे को अस्पताल में भर्ती करके इलाज शुरू किया गया। चिकित्सक व पूरे स्टाफ ने इलाज के साथ ही उनके खाने-पीने से लेकर दवाओं का तक की जिम्मेदारी ली। दो महीने तक अस्पताल में इलाज व उसकी सेवा से बच्चा स्वस्थ्य हो गया। टीबी का इलाज जारी है।

नौ की जगह वजन सिर्फ साढ़े तीन किलो

चिकित्सकों ने बताया कि दो वर्ष के बच्चे का वजन करीब नौ किलो तक रहता है। वहीं चलना भी शुरू कर देता है, लेकिन पीड़ित दुर्गेश का वजन सिर्फ 3.5 किलो था। वह कुछ खा भी नहीं पा रहा था। शुरू में उसे पाइप की मदद से खाना खिलाया गया। दवाओं और बेहतर खानपान से बच्चे का वजन दो माह में लगभग पांच किलो तक पहुंच गया। जो बच्चा हिल-डुल नहीं पा रहा था, वह खेलने लगा है। माता-पिता की आर्थिक तंगी को देखते हुए बच्चे को जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजा गया है, ताकि बच्चे को सही पोषक आहार मिले।

राज्य में कुपोषण की दर 31 प्रतिशत

राष्ट्रीय सर्वे एजेंसी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-पांच की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में कुपोषण की दर 31 प्रतिशत है। इसमें पांच से छह प्रतिशत बच्चे अति कुपोषित होते हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट की मानें तो प्रति 1000 जन्म लेने वाले बच्चों में 38 बच्चों की मौत हो जाती है। इसकी एक बड़ी वजह कुपोषण भी है। एक वर्ष में पोषण पुनर्वास केंद्रों में 7,000 से अधिक अति कुपोषित बच्चे आए।

अस्पताल प्रभारी शिशु रोग विशेषज्ञ डा. निलय मोझरकर ने कहा, दो माह पूर्व अस्पताल में भर्ती होने पर बच्चा अति कुपोषित था। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी दवा व खानपान के लिए हम सभी ने आर्थिक मदद की। बच्चे में काफी सुधार आ चुका है। उसकी बेहतरी के लिए अब उसे पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा गया है, ताकि सही आहार मिल सके।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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