Editorial chhattisgarh: कभी घरों की लिपाई-पुताई और ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाला गोबर लोगों के लिए गंदगी और बदबू भर ही रह गया था। आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ते समाज में उपयोगिता कम होने से गोबर शहर के सौंदर्य में बाधक बन रहा था। पशुपालक से लेकर आम जनता के लिए परेशानी बना गोबर अब लोगों को मालामाल कर रहा है। यही नहीं गोबर अर्थशास्त्र में भी अपनी दस्तक दे रहा है। यही नहीं गोबर का अपना अर्थशास्त्र उभरकर सामने आया है। इससे न केवल शहर की सफाई हो रही है, बल्कि कमाई भी हो रही है।

छत्तीसगढ़ में जब से गोधन न्याय योजना शुरू हुई है, तिरस्कार की नजरों से देखा जाने वाला गोबर फायदे का सौदा बन गया है। योजना से न केवल गंदगी का कारण बने गोबर के निस्तारण में मदद मिल रही है, बल्कि गरीबों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आ रहा है। खासतौर पर पशुपालन करने वाले किसान जो पहले गोबर को यहां-वहां फेंकते थे या नालियों में बहाते थे, उसे सहेजने लगे हैं। इससे दो फायदे हुए, पहला शहर में यहां-वहां फैले रहने वाले गोबर से निजात मिल रही है। दूसरा, बेकार समझा जाने वाला गोबर आय का जरिया बन रहा है।

यह बात शायद कम ही लोगों को मालूम हो कि स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर अंबिकापुर के नंबर कई बार गोबर से फैली गंदगी के कारण ही कटे हैं। गोधन न्याय योजना के बाद अंबिकापुर में गोबर से फैली गंदगी में कमी आई है। नगर निगम द्वारा रोजाना गोबर की खरीद करने से ऐसा संभव हो सका है। यानी गोधन न्याय योजना से न केवल शहरों की सफाई में मदद कर रही है, बल्कि पशुपालकों की कमाई भी करा रही है।

हाल ही में बीजापुर के एक व्यक्ति द्वारा गोबर से हुई कमाई से हवाई यात्रा की गई। इसके पहले एक ग्रामीण द्वारा गाय खरीदने और एक अन्य द्वारा बाइक खरीदने की खबरें सामने आ चुकी हैं। गोबर से बदलते हालात की कहानियां अभी भले ही कम हों, लेकिन आने वाले दिनों में इनकी संख्या बढ़ेगी। गोबर का अर्थशास्त्र विस्तार लेता दिख रहा है। सरकार जो गोबर खरीद रही है, उससे खाद और गोकाष्ठ बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इससे भी रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

जब योजना शुरू हुई थी, तब गोबर के इस अर्थशास्त्र का शायद ही किसी को अनुमान था। कुल मिलाकर राज्य में गोबर अब महज गोबर नहीं रह गया है, यह गोधन बन चुका है और लोग इसका फायदा भी उठा रहे हैं। मवेशियों को सड़कों पर आने के रोकने के उद्देश्य से की गई इस पहल से अगर भविष्य में हमारे शहर स्वच्छता रैंकिंग में ऊपर आते हैं तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।

Posted By: kunal.mishra

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