रायपुर। Dussehra 2020: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ब्राह्मणपारा में स्थित कंकाली मठ साल में एक बार दशहरा के दिन ही खोला जाता है। यह परंपरा लगभग 400 साल से निभाई जा रही है। कहा जाता है कि पहले मां कंकाली की प्रतिमा नागा साधुओं द्वारा स्थापित मठ में ही प्रतिष्ठापित थीं, जिसे बाद में भव्य मंदिर में स्थानांतरित किया गया। प्रतिमा भले ही मठ से थोड़ी दूर मंदिर में स्थापित कर दी गई, लेकिन नागा साधुओं के प्राचीन शस्त्रों को वहीं रहने दिया गया। इन्ही शस्त्रों को दशहरा के दिन सुबह साफ सफाई, पूजा करके भक्तों के दर्शनार्थ रखा जाता है। दशहरा पर सुबह से रात तक मठ खुला रहता है। रात्रि को पूजा पश्चात फिर एक साल के लिए मठ का द्वार बंद कर दिया जाता है।

शस्त्रों के दर्शनार्थ खोला जाता है मठ

मठ के महंत हरभूषण गिरी बताते हैं कि वर्तमान में कंकाली मंदिर में जो प्रतिमा है, वह पहले मठ में थी। 13वीं शताब्दी से लेकर 17वीं शताब्दी तक मठ में पूजा होती थी। नागा साधु ही पूजा करते थे। 17वीं शताब्दी में नए मंदिर का निर्माण होने के पश्चात कंकाली माता की प्रतिमा को मठ से स्थानांतरित कर मंदिर में प्रतिष्ठापित किया गया। प्रतिमा का स्थानांतरण तो कर दिया गया, लेकिन मठ में रखे प्राचीन अस्त्र-शस्त्रों को मठ के एक कमरे में ही रहने दिया गया। 700 साल बीत गए, लेकिन आज भी उसी मठ में अस्त्र-शस्त्र रखे हुए हैं। साल में एक बार दशहरा के दिन शस्त्रों का आम लोगों को दर्शन कराने और मठ के साधुओं का स्मरण करने के लिए ही मठ को खोला जाता है और अस्त्र-शस्त्रों की पूजा-अर्चना की जाती है। यह भी मान्यता है कि दशहरा के दिन मां कंकाली अपने मूल स्थान प्राचीन मठ में अस्त्र-शस्त्रों से युक्त होकर आती हैं। माता की आवभगत के लिए ही साल में एक बार मठ को खोल पूजा अर्चना की जाती है।

मठ में है साधुओं की समाधियां

मठ में रहने वाले नागा साधुओं में जब किसी नागा साधु की मृत्यु हो जाती तो उसी मठ में समाधि बना दी जाती थी। आज भी नागा साधुओं की समाधियां मठ में हैं।

मठ के पहले महंत कृपालु गिरी

13वीं शताब्दी में मठ स्थापना के 400 साल बाद 17वीं शताब्दी में मठ के पहले महंत कृपालु गिरी हुए। इसके बाद भभूता गिरी, शंकर गिरी महंत बने। तीनों निहंग संन्यासी थे, लेकिन समय काल परिवर्तन के साथ महंत शंकर गिरी ने निहंग प्रथा को समाप्त कर शिष्य सोमार गिरी का विवाह कराया। उनकी संतान नहीं हुई तो शिष्य शंभू गिरी को महंत बनाया। शंभू गिरी के प्रपौत्र रामेश्वर गिरी के वंशज वर्तमान में कंकाली मठ के महंत एवं सर्वराकार हैं।

महंत ने ली थी जीवित समाधि

ऐसी मान्यता है कि मठ के महंत कृपालु गिरी माता ने स्वप्न में दर्शन देकर मठ से हटाकर तालाब के किनारे टीले पर मंदिर बनवाकर स्थापित करने का आदेश दिया। महंत ने कंकाली मंदिर का निर्माण करवाया। माता ने महंत को बालिका के रूप में दर्शन दिया किन्तु महंत समझ नहीं पाए। थोड़ी देर में बालिका अदृश्य हो गई। इसके बाद महंत की चेतना जागी और उन्हें खूब पछतावा हुआ कि माता ने स्वयं दर्शन दिया और वे समझ नहीं पाए। इसके बाद महंत ने कंकाली मंदिर के समीप ही जीवित समाधि ले ली।

ये शस्त्र हैं कंकाली मठ में

कंकाली मठ में एक हजार साल से अधिक पुराने शस्त्रों में तलवार, फरसा, भाला, ढाल, चाकू, तीर-कमान जैसे शस्त्र रखे हुए हैं।

रविवार को दिनभर खुला रहेगा मठ

महंत हरभूषण गिरी ने बताया कि इस बार दशमी दो दिन है, लेकिन मठ में रविवार को दशमी पूजन होगा। कोरोना को देखते हुए रविवार को सुबह से रात 10 बजे तक ही मठ को खुला रखा जाएगा। 11 बजे तक आरती करके फिर बंद कर दिया जाएगा।

Posted By: Himanshu Sharma

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