E-Toilet Issue In Raipur: सतीश पांडेय, रायपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। छत्‍तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बंद पड़े 11 ई-टायलेट को शुरू करने के लिए बैंगलुरू की ठेका कंपनी इरोम ने दिलचस्पी दिखाई है। कंपनी ने स्थानीय स्तर पर टायलेट का रखरखाव का काम देख रहे होप फार हयूमैनिटी एजेंसी को खराब पार्टस भेजने को कहा है।

एजेंसी का कहना है कि इसी हफ्ते पार्टस प्राप्त हो जाएंगे। इसके बाद खराब पार्टस को बदलकर सभी ई-टायलेट को फिर से त्योहारी सीजन में आम जनता के लिए शुरू कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि नईदुनिया में पिछले चार दिन से लगातार बंद पड़े ई-टायलेट को लेकर खबर का प्रकाशन करता आ रहा है। स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने इसे संज्ञान में लेकर ठेका एजेंसी को मरम्मत का काम करने के निर्देश दिए है।

रायपुर शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की कवायद जारी है। इसके लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड लगातार विकास कार्य कराते आ रहा है। इसी क्रम में चार साल पहले मेट्रो सिटी की तर्ज पर शहर में 11 जगहों पर 72 लाख रुपये की लागत से ई-टायलेट स्थापित किया गया लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहे कि ई-टायलेट खुलने के कुछ महीने के भीतर ही एक-एक करके सारे बंद हो गए।

वर्तमान में सारे ई-टायलेट के दरवाजे बंद पड़े हुए है। अब इन दरवाजे को खोलने की कवायद शुरू हो गई है।नईदुनिया के अभियान सोच बदलो, शौचालय खोलो को आम लोगों ने काफी सराहा है। रायपुर नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अधिकारी बेगलुरू की ठेका कंपनी से जल्द से जल्द बंद पडे सारे ई-टायलेट को खोलने के लिए अब दबाव बनाने लगे है।

जनजागरूकता का अभाव

अनेक खूबियों वाले ई-टायलेट को लेकर आम जनों में जागरूकता का अभाव भी देखा गया है।लोगों में जनजागरूकता लाने नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड भी इसके इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करने का पहल करेगी। अधिकारियों ने बताया कि शहर में स्थापित पहला इलेक्ट्रानिक शौचालय को जनजागरूकता के अभाव में अपेक्षित रिस्पांस नहीं मिल पाया।जबकि ई-टायलेट बहुउपयोगी टायलेट है, जिसकी उपयोगिता के बारे में लोग अनजान है।

सफेद हाथी बना ई-टायलेट

राजधानी में लाखों की लागत से ई-टायलेट को स्थापित किए करीब चार साल हो चुके है। लेकिन इसे लेकर लोग अब तक जागरूक नहीं हुए है। यही कारण है कि वर्तमान में यह सफेद हाथी बनकर रह गया है। देखरेख करने वाली कंपनी का कहना है कि रोजाना काफी संख्या में लोग इसका उपयोग करते है।

गंदगी और बदबू रहित इस टायलेट के उद्देश्य के बारे में नगर निगम अब विशेष कार्ययोजना बनाकर काम करेगी। इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लोगों में जन जागरूकता लाएगी। बकायदा सूचना चस्पा किया जायेगा,ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल कर सके।

पार्टस चुरा ले गए आसामजिक तत्व

स्थानीय स्तर पर ई-टायलेट की मरम्मत और रखरखाव का काम होप फार हयूमैनिटी एजेंसी को स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने सौंपा है। एजेंसी से जुड़े लोगो का कहना है कि ई-टायलेट के पार्टस धीरे-धीरे चोरी हो रहे थे। असामाजिक तत्व तोड़फोड़ करने के साथ आसपास गंदगी फैला देते थे। इसके कारण काफी परेशानी उठानी पड़ी। कोरोना संकटकाल के कारण दो साल तक बेगलुरू की ठेका कंपनी इरोम ने भी ध्यान नहीं दिया।इस दौरान पार्टस खराब होने से ई-टायलेट बंद होते चले गए।

ई-टायलेट को दोबारा शुरू करने बेगलुरू की ठेका कंपनी इरोम से हुई बातचीत

बंद पड़े सारे ई-टायलेट को दोबारा शुरू करने के लिए बेगलुरू की ठेका कंपनी इरोम से बातचीत हुई है। कंपनी के अधिकारियों ने खराब पार्टस को बदलने के लिए एक-दो दिनों के भीतर नया पार्टस भेजने कहा है। पार्टस मिलते ही इसे लगाकर फिर से ई-टायलेट की सुविधा शुरू की जाएगी।

ई-टायलेट के रखरखाव के प्रति आम लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा। तोड़फोड़ और गंदगी न फैलाए तो यह टायलेट हर सबके के लिए काफी उपयोगी साबित होगा। -सौरभ टिपनिस, अध्यक्ष-होप फार हयूमैनिटी एजेंसी

Posted By: Kadir Khan

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