-कैंसर रोगियों को मिली इपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथैरेपी पद्धति की सुविधाएं

कैंसर रोग विभाग की ओटी में महिला की सर्जरी करते चिकित्सक। - सौ, अस्प्ताल।

रायपुर। Cancer Treatment: आंबेडकर अस्पताल स्थित क्षेत्रीय कैंसर संस्थान के डॉक्टरों ने गुरुवार को ओवेरियन (अंडाशय) कैंसर से जूझ रही 45 वर्षीय महिला का उपचार हाइपेक तकनीक से कर उन्हें नया जीवन दिया है। करीब आठ घंटे तक चले आपरेशन में कैंसरग्रस्त गांठों को नष्ट करने के लिए पहली बार हाइपेक तकनीक का प्रयोग किया गया।

कैंसर सर्जन प्रोफेसर डॉक्टर आशुतोष गुप्ता ने बताया कि रायपुर की 45 वर्षीय महिला ओवेरियन कैंसर की बीमारी का इलाज कराने कैंसर विभाग में पहुंची। यहां पर कैंसर संस्थान के निदेशक डॉक्टर विवेक चौधरी ने महिला की बीमारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर पाया कि यह कैंसर काफी एडवांस स्टेज में हैं और समय रहते उपचार करना आवश्यक है।

इस बीच महिला के एडवांस स्टेज के ओवेरियन कैंसर से प्रभावित हिस्सों को नष्ट करने के लिए इपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथैरेपी (हाइपेक) पद्धति से उपचार करने का निर्णय लिया। इसके बाद सर्जरी कर पेट के अंदर के कैंसरग्रस्त गांठों को नष्ट किया गया। शेष कैंसर कोशिकाओं को दवाओं के ज़रिए नष्ट करने के लिए पेट के माध्यम से सीधे कीमोथेरेपी दी गई।

निशुल्क हुआ इलाज

विशेषज्ञों के मुताबिक मेट्रो सिटी में इस प्रकार की तकनीक से कैंसर का उपचार प्राप्त करने के लिए आठ से दस लाख रुपये तक खर्च आता है। मगर, क्षेत्रीय कैंसर संस्थान में मरीज की सर्जरी निश्शुल्क की गई। डॉक्टर गुप्ता ने बताय कि हाइटेक प्रक्रिया कैंसर सर्जरी के साथ की जाती है, जिसमें कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए उच्च तापमान के साथ कीमोथेरेपी दवाओं का उपयोग शामिल है।

प्रदेश के प्रथम शासकीय कैंसर संस्थान में इस तरह के उन्नत तकनीक से हुए उपचार ने कैंसर मरीजों को और बेहतर इलाज की सुविधाएं मिल पाएगी। सर्जरी में डॉ. भारत भूषण, डॉ. शांतनु तिवारी, डॉ. क्षितिज वर्मा, डॉ. मनीष साहू और एनेस्थेटिस्ट डॉ. सोनाली साहू की मुख्य भूमिका रही।

यह है हाइपेक तकनीक

हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी कैंसर उपचार की एक पद्धति है, जिसमें उदर गुहा (एब्डामिनल कैविटी) के माध्यम से सर्जरी के तुरंत बाद कीमोथैरेपी दवाएं दी जाती है। दवाओं को एक निश्चित तापमान पर गर्म किया जाता है। पेट के ट्यूमर और प्रभावित अन्य हिस्सों को सर्जरी के जरिए हटाने के बाद हाइपेक तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान रोगी के शरीर का तापमान सुरक्षित रखा जाता है।

इस तकनीक का फायदा यह है कि कीमोथेरेपी की दवा पेट के सभी हिस्सों तक पहुंच जाती है और कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इससे भविष्य में कैंसर की पुनरावृत्ति का जोखिम कम हो जाता है। यह कई हफ्तों में किए जाने वाले लंबे उपचार के बजाय आरेटिंग रूम में किया जाने वाला एक ही उपचार है। 90 फीसद दवा पेट के अंदर रहती है, जो शरीर के बाकी हिस्सों पर दवा के विषाक्त प्रभाव को कम करता है।

Posted By: Shashank.bajpai

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