रायपुर। Elephant In Chhattisgarh : प्रदेश में हाथी-मानव द्वंद्व बड़ी समस्या बनकर उभरा है। छत्तीसगढ़ में पिछले तीन साल में 261 लोगों की जान गई है। हाथियों के झुंड ने अब तक कई एकड़ फसल चौपट की है। नुकसान के एवज में शासन ने पिछले पांच साल में 80 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा है।

हाथियों का झुंड धीरे-धीरे मानव रहवास क्षेत्र में बढ़ रहा है जो वन विभाग के अधिकारियों के मुसीबत बन रहा है। हाथी मानव-द्वंद्व को रोकने के लिए अधिकारियों ने अब तक एक दर्जन से अधिक प्रयोग किए, लेकिन सफलता नहीं मिली है। वन विभाग का कहना है कि हाथी-मानव द्वंद्व रोकने के लिए लगातार कोश्ािश्ा की जा रही है, जल्द ही इस पर सफलता मिलेगी।

गौरतलब है कि गर्मी शुरू होते ही प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में जंगली हाथियों का उत्पात बढ़ जाता है। प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने पर फसलों की कटाई के बाद हाथियों के समक्ष चारा, पानी की समस्या उत्पन्ना हो जाती है। भोजन-पानी की तलाश में हाथी आबादी क्षेत्र की ओर रुख करते हैं।

हाथी स्वच्छंद विचरण करते हुए न केवल फसलों को रौंदते हैं, बल्कि मकानों को तोड़ने के साथ लोगों को कुचलकर मौत के घाट उतार देते हैं।

प्रभावित क्षेत्र के लोग जान बचाने की जुगत में लगे रहते हैं। राज्य के 12 से अधिक जिलों में हाथियों का आतंक है। छत्तीसगढ़ में हाथी-मानव द्वंद्व की समस्या लंबे अर्से से चली आ रही है, लेकिन ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा है। पिछले दो साल से हाथियों का झुंड राजधानी के करीब पहुंचने लगा है।

हाथियों को रोकने के लिए इतनी योजना

वन विभाग के मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2011 से 2017 के बीच मानव-हाथी द्वंद्व रोकने के लिए विभाग ने एक दर्जन से अधिक योजना लागू की, जिसमें प्रमुख रूप से सोलर फेंसिंग, मधुमक्खी पालन, रेडियो कालर, हाथी के गले में घंटी लगाने समेत कई उपाय किए।

इन पर शासन ने करीब 45 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की, लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला। वन विभाग द्वारा किए जा रहे हाथियों के संरक्षण के दावों के बीच बीते पांच वर्षों में 36 से अधिक हाथियों की जान गई है।

हाथियों के हमले से हुईं लोगों की मौतें

वर्ष मौत

2016-17 74

2017-18 74

2018-19 56

2020-21 57

इतने मरे हाथी

वर्ष मौत

2017-18 11

2018-19 17

2019-20- 09

2020-21 12

वाइल्ड लाइफ छत्तीसगढ़ पीसीसीएफ पीवी नरसिंहा राव ने कहा कि हाथियों को रोकने के लिए जंगल में पर्याप्त पानी, चरागाह की व्यवस्था की जा रही है, जिससे वे जंगल में ही रहें। जंगल में जब हाथियों को खाने-पीने के लिए पर्याप्त मात्रा में मिलने लगेगा तो वह बाहर नहीं निकलेंगे।

Posted By: Kadir Khan

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