रायपुर। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले सरकारी अधिकारी-कर्मचारी ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए परेशान हो रहे हैं। इन दिनों मंत्रालय से लेकर मंत्रियों के बंगलों तक आवेदन लेकर पहुंचने वालों की भीड़ जुट रही है। दिक्कत यह है कि मंत्री और वरिष्ठ अफसर विधानसभा के बजट सत्र में व्यस्त हैं इसलिए ऐसे आवेदनों पर कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है।

इधर निर्वाचन आयोग ने 20 फरवरी तक स्थानांतरण की मियाद तय कर दी है। इसके बाद लोकसभा चुनाव के खत्म होने तक कोई स्थानांतरण नहीं हो पाएगा। ऐसे में वे सरकारी कर्मी ज्यादा परेशान हैं जिनका आदेश विधानसभा चुनाव से पहले निकल जाना चाहिए था लेकिन आचार संहिता में उलझ गया था।

आचार संहिता खत्म हुई तो नई सरकार बन गई और मंत्री बदल गए। इसके बाद नए सिरे से सेटिंग जमाने में वक्त बीत गया। फिर विधानसभा का सत्र शुरू हो गया। और अब एक हफ्ते के बाद स्थानांतरण पर रोक लग जाएगी।

ऐसे ऐसे मामले-

केस 1-

स्थानांतरण चाहने वालों में कई के प्रकरण पति-पत्नी से संबंधित हैं। एक व्याख्याता की पत्नी राजधानी में संचालनालय में पदस्थ हैं जबकि वे स्वयं दंतेवाड़ा में पदस्थ हैं। पिछली सरकार में जुगाड़ लगाकर राजधानी में अटैच रहे। सरकार बदली तो अटैचमेंट समाप्त हो गया। अब फिर से पति-पत्नी के बिछड़ने की नौबत आ गई है।

केस 2-

सहकारिता विभाग में सब आडिटर्स की पदोन्न्ति की फाइल पिछले एक साल से अटकी है। विधानसभा चुनाव के समय कहा गया कि अभी आचार संहिता है, नई सरकार बनने के तुरंत बाद काम हो जाएगा। अब दोबारा आचार संहिता लगने वाली है लेकिन फाइल वहीं अटकी हुई है।

केस 3-

उद्यानिकी विभाग में कुछ सैनिकों की नियुक्ति का प्रकरण लंबित है। इन सैनिकों ने ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी की परीक्षा व्यापमं से पास की है लेकिन सबकुछ होने के बाद अधिकारियों ने यह कहकर नियुक्ति अटका दी कि वे निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते। जीएडी के नियम निकाले गए तो पता चला कि सैनिकों को विशेष छूट देने का प्रावधान है। अब विभाग प्रमुख ने कह दिया है कि फाइल पुटअप करो लेकिन फाइल दबी हुई है।

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