रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बड़ी बहन की किडनी खराब होने के बाद अंग प्रत्यारोपण के लिए जूझते रहे, इंजीनियर आकाश श्रीवास्तव का इलाज के बीच अस्पताल खोलने के लिए देखा सपना जल्द साकार होने जा रहा है। राज्य में अंग प्रत्यारोपण के इलाज के लिए 200 बिस्तरों का डेडिकेटेड अस्पताल बनाने की तैयारी में है। जिसमें शासन की मदद से जरूरतमंद लोगों को अंग प्रत्यारोपण से जुड़ी सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी।

श्रीवास्तव ने बताया कि वर्ष-2009 में बड़ी बहन के किडनी खराब होने की जानकारी हुई। परिवार के किसी भी सदस्य का किडनी काम नहीं आने की वजह से आठ साल तक डायलिसिस के बाद एक रिश्तेदार किडनी देने के लिए तैयार हुए। इतने वर्षों में बहन की तकलीफ के साथ ही राज्य में अंग प्रत्यारोपण की सुविधाओं व बेहतर इलाज को लेकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान भविष्य में अस्पताल खोलने का सपना देखा था, जो हर वर्ग के लिए मददगार हो। श्रीवास्तव ने बताया, इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी होने के बाद भारत नेट प्रोजेक्ट समेत अन्य कार्य करने के साथ ही अंग प्रत्यारोपण के लिए अस्पताल पर शोध करता रहा। इस बीच तकनीकों को समझने सिंगापुर गया। वहां यूएस की मायो क्लीनिक संस्था से जुड़कर करार किया।

200 करोड़ रुपये की योजना, 20 माह में पूरा होगा प्रोजेक्ट

श्रीवास्तव ने बताया कि तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों को साथ लाकर 200 करोड़ रुपये के अस्पताल की योजना पर अंतत: मुहर लग चुकी है। भिलाई के नेहरू नगर में जमीन चिन्हित कर लिया गया है। जनवरी से अस्पताल पर का शुरू हो जाएगा। जो 20 माह में बनकर पूरा होगा। श्रीवास्तव ने बताया कि सपना साकारा होने के साथ ही उन तमाम मरीजों जिन्हें अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता होगी, बेहद कम दर पर बल्कि जरूरमंदों को सामाजिक संस्थानों की मदद के माध्यम से निश्शुल्क सेवाएं उपलब्ध कराई जाएगी।

अस्पताल में मिलेगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

श्रीवास्तव ने बताया कि यह राज्य का पहला अंग प्रत्यारोपण डेडिकेटेड अस्पताल होगा, जो प्रत्येक मरीजों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देगा। यहां किडनी, लिवर, हृदय, बोमैरो, कार्निया समेत सभी तरह के अंग प्रत्यारोपण से जुड़े इलाज होंगे। वहीं मरीजों के लिए चिकित्सा सेवाएं भी बेहद आसान होगी।

Posted By: Vinita Sinha

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