Coronavirus In Chhattisgarh: रायपुर। इंजीनियरों को आपने नक्शा बनाते सुना होगा... अध्यापकों को पढ़ाते देखा होगा, लेकिन अब इंजीनियर नक्शा तो बनाएंगे ही और अध्यापक पढ़ाएंगे भी, लेकिन इसके साथ ही सर्दी-खांसी के मरीज तलाशते भी नजर आएंगे। क्योंकि राज्य सरकार ने इंजीनियर और अध्यापकों की कोरोना में सर्वें करने की ड्यूटी लगाई है। घर-घर जाकर ये लोगों से पूछेंगे कि कहीं आपको सर्दी तो नहीं हुई है। शासन के इस फैसले से अध्यापकों और इंजीनियरों में काफी रोष देखने को मिल रहा है। इंजीनियर और अध्यापक कैसे जांच कर पाएंगे कि किसको सर्दी और जुकाम है?

ज्ञात हो कि वैश्विक महामारी घोषित कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए सर्वेक्षण दल में प्रतिनियुक्त आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका, अध्यापक और इंजीनियरों की ड्यूटी लगाई गई है। सर्वेक्षण दल को शासन ने निर्देश दिए हैं कि वे अपने संबंधित क्षेत्र के अंतर्गत कोरोना वायरस के संक्रमण की पहचान के लिए घरों एवं परिवारों के बीच जाकर सर्वेक्षण करें।

सर्वेक्षण के दौरान प्रत्येक दवा दुकान और सामुदायिक व ग्रामीण चिकित्सक से संपर्क कर बुखार के साथ खांसी अथवा सांस लेने वाले चिन्हित मरीजों की जानकारी विवरणी प्रपत्र में एकत्रित करें। साथ ही प्राप्त की गई सूची का सत्यापन कर संदिग्धों की सूची तैयार कर सूची को संबंधित पंचायत सचिवों के माध्यम से जानकारी उपलब्ध करानी है। सर्वे के लिए राजधानी के करीब 38 इंजीनियरों की ड्यूटी लगाई गई है।

मन से नहीं हो रहा काम

सूत्रों की मानें को ड्यूटी गलत ढंग से लगाने की वजह से सर्वे के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। नईदुनिया की टीम ने पड़ताल की तो जो तथ्य सामने आए, वे काफी चौंकाने वाले थे। सर्वे की टीम जांच करने के लिए मोहल्लों में पहुंच तो रही है, लेकिन वह मकान स्वामी का नाम और मोबाइल नंबर लेकर वापस लौट आ रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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