रायपुर। प्रदेश भर में हो रही ई- रजिस्ट्री में एक नया खुलासा हुआ है। बिना बायोमैट्रिक लिंक के रजिस्ट्री की जा रही है। साथ ही सॉफ्टवेयर भी जांच के बगैर ही संचालित किया जा रहा है। यह खुलासा विभाग की ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट में ई- रजिस्ट्री करने वाले सॉफ्टवेयर में 46 खामियां गिनाई गई हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि ई-रजिस्ट्री में आसानी से सेंध मारी की जा सकती है। साथ ही विभागीय रिपोर्ट में बायोमैट्रिक लिंक नहीं होने से फर्जी रजिस्ट्रिी की आशंका जताई गई है।

गौरतलब है कि फरवरी 2017 में हैदराबाद की कंपनी एमआरएस और आइटी साल्यूशन ने सॉफ्टवेयर बनाने और संचालन का बीओटी की तरह जिम्मा उठाया था। इसमें कुछ ही शहरों में कंपनी ने अपने कम्प्यूटर और कर्मचारी रखकर ई-रजिस्ट्री की सुविधा शुरू की, लेकिन सॉफ्टवेयर को ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक बिना जांच (गो लाइव) के प्रारंभ कर दिया। वहीं दिसंबर 2018 में प्रदेश भर में इस सॉफ्टवेयर से ई- रजिस्ट्री चालू कर दी गई। इसके एवज में कंपनी प्रति रजिस्ट्री कॉपी 60 रुपये लेती है।

इस तरह हो रही है ई-रजिस्ट्री

सॉफ्टवेयर में अभी पंजीयनकर्ता और पंजीयक के डिजिटल हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए जाते हैं। निशान को जीपीजी फार्मेट के माध्यम से दस्तावेजों पर लगा दिया जाता है। नियम के मुताबिक डिजिटल हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान सीधे तौर पर पेपर में किए जाते हैं, ताकि ई- रजिस्ट्री पूरी तरह से लॉक हो जाए। इसमें किसी भी प्रकार के सुधार की गुंजाइश न हो, बल्कि अभी आपकी रजिस्ट्री में आसानी से सुधार किया जा सकता है। इससे फर्जी रजिस्ट्री की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

इनका कहना है

साफ्टवेयर की ऑडिट रिपोर्ट होने के बाद कई खामिंया सामने आई हैं। सॉफ्टवेयर बिना गो लाइव (जांच) के चलाया जा रहा है। साथ ही हस्ताक्षर बायोमैट्रिक के बजाय जीपीजी फार्मेट में लगाए जा रहे हैं। रजिस्ट्री में प्रति पेज 60 रुपए लिए जाते हैं जो काफी अधिक है, इससे कंपनी के खाते में 25 करोड़ करीब सालाना जाते हैं। इन सभी चीजों को सुधारने के लिए एनआइसी, पुणे से बातचीत जारी है, इसका खर्च केवल चार करोड़ होगा। इससे रजिस्ट्री के पेज के शुल्क में काफी गिरावट आ जाएगी।

- धर्मेश साहू, महानिरीक्षक पंजीयन, छत्तीसगढ़