रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

क्षेत्रीय समन्वय संस्थान एनआइटी रायपुर ने उन्नत भारत अभियान 2.0 के अंतर्गत प्रतिभागी संस्थानों के साथ विचार-विमर्श के लिए एनआइटी में एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें नये प्रतिभागी संस्थानों का स्वागत किया गया और पुराने संस्थानों से योजनाओं, कठिनाइयों और उनके समाधान पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में रिलायंस सिक्योरिटीज लिमिटेड नई दिल्ली के कैटर मैनेजर प्रियब्रत पांडेय और गोविंदराम सेकसरिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी एंड साइंस, इंदौर के प्रोफेसर डॉ. मिलिंद डांडेकर को बतौर वक्ता आमंत्रित किया गया था। वक्ताओं ने कहा कि उन्नत भारत अभियान ऐसी मुहिम है जिसमें समाज एवं ग्रामीण कल्याण के लिए विभिन्न संस्थान सहयोग दे रही हैं। कई समस्याएं भी हैं, जिनके समाधान के लिए इंटरैक्टिव सेशन भी रखा गया। इसके माध्यम से कई समस्याओं पर बात की गई।

प्रियब्रत ने टेक्निकल एवं आर्थिक फंडिंग से जुड़ी कई योजनाएं बताईं, जिनके सहयोग से और सरकारी योजनाओं से उन्नत भारत अभियान को प्रभावी तरीके से अंजाम दे सकते हैं। डॉ. मिलिंद डांडेकर ने अपने झाबुआ प्रोजेक्ट के बारे में बताया कि उन्होंने महात्मा गांधी के ग्रामीण स्वराज की इस मुहिम पर वानर सेवा के तहत युवाओं को जागरूकता फैलाने एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रेरित किया। उनका पहला प्रोजेक्ट पोषण वाटिका था, जिसमें रसोई घर के अपशिष्टों का इस्तेमाल कर खाद्य संबंधी समस्याओं का तोड़ निकाला और नागरिकों की समस्याओं को दूर किया।

0बताया फंडिंग आदि के बारें में

यूबीए 2.0 के रीजनल कोऑर्डिनेटर डॉ. सुधाकर पांडे ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सीएसआर फंडिंग विवरण, यूबीए में लोगों की भागीदारी और छत्तीसगढ़ क्षेत्र के प्रतिभागी संस्थानों द्वारा की गई गतिविधियों का प्रदर्शन करना है। यह आयोजन पीआई समन्वयकों को उद्योगों से सीएसआर निधियों को प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। कैसे यूबीए गतिविधियों में तिहरी क्षेत्रों के लोगों को शामिल किया जाए और कैसे अनुकूलित तरीके से क्षेत्रीय ग्रामीण मुद्दों को हल किया जाए इस पर विस्तार से चर्चा की गई।

Posted By: Nai Dunia News Network

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