रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

पश्चिम में एक कहावत है कि पहले दुश्मन को बुरा नाम दो और फिर उसे मार दो। ऐसा ही कुछ किया गया सिंध के आखिरी हिंदू राजा के साथ। क्योंकि उस राजा ने अपने दम पर 32 वर्षों तक मुगल आक्रांता मोहम्मद बिन कासिम को सिंध से आगे नहीं बढ़ने दिया।

कुछ इसी तरह के नाटक के माध्यम से राजा डाहर की विशेषता बताई गई। सिंधी समाज की ओर से राजा डाहर सेन की जंयती के अवसर पर यह आयोजन किया गया। महिलाओं ने सिंधी गानों पर डांस कर अपने राजा के संघर्षों की गाथा बयां की।

शंकर नगर स्थित सिंधी भवन में रविवार की शाम को यह कार्यक्रम हुआ। महिला विंग की अध्यक्ष डिंपल ने बताया कि 25 अगस्त को राजा डाहर सेन का जन्म हुआ था। वे सिंध प्रदेश में थे, लेकिन बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गये। वे सिंधी समाज के आखिरी राजा रहे। उन्हीं कि जन्म दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष कार्यक्रम कराया जाता है। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. केजी लाल, विशिष्ट अतिथि आनंद कुकरेजा, अमर पारवानी के साथ कमल लहेजा मुख्य तौर पर मौजूद रहे।