रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रायपुर पुलिस ने ट्रक चोरी गैंग के पांच और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। लीज में ट्रक लेकर फर्जी दस्तावेज के माध्यम से ट्रक बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। फर्जीवाड़ा रैकेट का संचालन बिहार से होता था। मास्टर माइंड नागेंद्र कुमार सिन्हा को पुलिस ने पकड़ा है। पुलिस ने पूर्व में छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इसमें मुजफ्फरपुर निवासी सत्येन्द्र कुमार नागेंद्र सिंहा के साथ मिलकर पूरा खेल करता था। आरोपितों के पास से अब तक 40 ट्रक जब्त किए गए हैं। 283 ट्रक लीज में लिए गए थे। जिन्हें बदमाशों ने फर्जी इंजन, चेचिस और दस्तावेज के सहारे बेच दिया था।

मंगलवार को मामले का राजफाश करते हुए एसपी अभिषेक माहेश्वरी ने बताया कि इंजन, चेचिस सहित अन्य दस्तावेज बदलने का काम नार्थ ईस्ट से होता है। आरोपित नागालैंड की पासिंग की गाड़ी बताकर आसानी से ट्रांसपोर्टर तक खपा देते थे। गिरफ्तार आरोपितों से कुछ अहम जानकारी मिली है। आरटीओ से भी फर्जी दस्तावेज के बारे में जानकारी मांगी गई है। पुलिस ने नागेंद्र कुमार सिन्हा निवासी सोहगी गोड़, पटना बिहार, सिद्धांत कुमार सिंग, निवासी बंडोहपर थाना गौड़ीचक पटना बिहार, चरणजीत सिंग निवासी अशोक चौक राममनोहर लोहिया लाईब्रेरी नागपुर महाराष्ट्र, गिरीश कोटवानी निवासी आदर्श कालोनी अकोला महाराष्ट्र, अवनींद्र सिंह उर्फ मधुर निवासी प्रताप विला पुरानी बस्ती कोहका थाना सुपेला जिला दुर्ग को गिरफ्तार किया है।

नागेंद्र और सत्येंद्र ने मिलकर फैलाया जाल :

- आरोपित सत्येंद्र को नागेंद्र लीज पर गाड़ी दिलवाने का काम करता था। इसमें प्रत्येक गाड़ी में नागेंद्र को 10 से 15 हजार रुपये कमीशन मिलता था। दोनों ट्रांसपोर्टर का काम करते हैं। नागेंद्र सिन्हा सत्येंद्र को लीज पर हर महीने 80 से 85 हजार रुपये देने की बात कहकर ट्रक लीज में दिलाता था। ट्रक मालिक को दो-तीन महीने ट्रक का किराया देते थे। इसके बाद ट्रक मालिक को ट्रक चोरी होने की बात कह ट्रक की हुलिया बदलने के साथ चेचिस नंबर बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जो सेकेंड हैंड ट्रक लेना चाहते हैं उन्हें बेच देते थे।

यहां से बनता है दस्तावेज :

गिरोह द्वारा नागालैंड, अरूणाचल प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के परिवहन विभाग के आरटीओ एजेंट से मिली भगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। यह गिरोह बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में सक्रिय रहते हुए घटना को अंजाम देते थे। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा ट्रक दुर्ग से जब्त की गई है।

ऐसे आया सामने :

उत्तरप्रदेश, मऊ निवासी अनुज कुमार सिंह की शिकायत के बाद पुलिस ट्रक लीज में लेकर फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का भांडाफोड़ करने में पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी। बिलासपुर के ट्रांसपोर्टर शेख मकसूद, उपेंद्र शर्मा के भनपुरी स्थित यार्ड में ट्रक खरीदने के लिए गया था। शंका होने पर ट्रांसपोर्टर ने चेचिस नंबर के आधार पर अनुज से संपर्क किया, तो उसने बताया कि वह नागेंद्र को ट्रक लीज में दिया है। ट्रक को बेचे जाने की जानकारी मिलने के बाद अनुज ने मामले की शिकायत थाने में की। जब बिलासपुर के ट्रांसपोर्टर ट्रक देखने गया था, तब तक चेचिस नंबर को बदला नहीं गया था। भनपुरी के यार्ड में पेंट किया जा रहा था।

सब के काम बंटे हुए :

- आरोपित नागेंद्र कुमार सिंहा : इसका काम था लीक पर ट्रक देने वाले मालिकों को सत्येंद्र तक पहुंचाना। इसके एवज में वह प्रत्येक ट्रक दिलाने के नाम पर 10 हजार कमीशन लेता था।

- आरोपित चरणजीत सिंग : आरोपित आटो डीलर का काम करता था। इसका नेटवर्क दूसरे राज्याें में फैला था। यह फर्जी दस्तावेज के सहारे बने ट्रकों को बेचने का काम करता था।

- आरोपित गिरीश कोटवानी : इसका नार्थ ईस्ट में सीधा संपर्क था। जहां से वह फर्जी दस्तावेज, इंजन नंबर, चेचिस नंबर को बदलवाने का काम करता था।

- अवनींद्र सिंह उर्फ मधुर : यह आरटीओ एजेंट है। आरटीओ कार्यालय से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाने का काम करता था।

- सिद्धांत कुमार सिंग : इसका भी काम ट्रांसफोर्ट का है। यह गाडि़यों को बिकवाने में मदद करता था। इसके बदले में कमीशन लेता था।

स्कूल में शिक्षक है नागेंद्र, सात लाख रुपये नकदी जब्त :

- आरोपित नागेंद्र अंग्रेजी से एमए किए हुआ है। वह एक निजी स्कूल में पढ़ाता भी था। उसके पास से सात लाख 50 हजार रुपये जब्त किए गए हैं। इसके अलावा एक कार, एक नग लैपटाप, आठ नग मोबाइल फोन सहित ट्रकों का आरसीबुक, सहमति पत्र, कागजात एवं हिसाब-किताब का रजिस्टर व डायरी किया जब्त किया गया है।

Posted By: Abhishek Rai

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