रायपुर। खाद्य विभाग में फर्जी संस्था को राशन दुकान आवंटित करने के मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेज बताते हैं कि महिला स्व. सहायता समूह के दस्तावेज में कांट-छांट करके फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए हैं। इसके बाद उसी फर्जी पंजीयन प्रमाण के आधार पर खाद्य विभाग ने दो-दो राशन दुकानें संस्था को आवंटित कर दी हैं। स्व. सहायता समूह का पंजीयन 2005 में फर्म एवं पंजीयन सोसाइटी द्वारा किया गया था। 441001019 और 441001014 राशन दुकान चलाने के लिए दे दी गई।

असली समिति के प्रतिनिधि ने खाद्य विभाग द्वारा मांगे जाने पर पंजीयन के दस्तावेज जमा किए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि उसी पंजीयन दस्तावेज की फोटो कापी से कांट-छांट कर नकली पंजीयन सर्टिफिकेट बनाए गए। इतना ही नहीं, फर्जी पंजीयन प्रमाण पत्र में ऐसे सदस्यों के नाम जोड़े गए, जो असल में इस संस्था के सदस्य ही नहीं हैं। इस फर्जी पंजीयन प्रमाण पत्र की जांच किए बिना खाद्य विभाग द्वारा खमतराई की दुकान क्रमांक 441001014 को भी अटैच कर दिया।

जानिए, क्या है नियम

नियमानुसार किसी भी संस्था को राशन दुकान देने से पहले विभाग द्वारा उनके पंजीयन संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन फर्म एवं पंजीयन सोसाइटी द्वारा कराया जाता था। इसके अलावा संस्था की आडिट रिपोर्ट भी जमा करवाई जाती है, लेकिन खाद्य विभाग के अफसरों ने संस्था के दस्तावेजों की जांच तक कराना उचित नहीं समझा।

मूल दुकान नहीं, फिर भी कर दिया अटैच

फर्जी दस्तावेजों से बनाई गई संस्था के नाम पर खुद की कोई मूल दुकान नहीं है। संस्था की मूल दुकान 2012 में ही समाप्त कर दी गई थी। नियम यह है कि जिस संस्था के पस मूल दुकान नहीं होगी तो उसे अटैच नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके बावजूद बिना किसी मूल दुकान के ही दूसरी दुकानों को अटैच कर दिया गया। इसकी अनुशंसा भी खाद्य निरीक्षक द्वारा ही की गई।

गलत तरीके से बारदाने का आहरण भी किया

फर्जी संस्था द्वारा 441001014 दुकान की पूर्व में चलाने वाली संस्था की बारदाना के तकरीबन दो लाख रुपये मार्कफेड के जिला कार्यालय में कैंसल चेक जमा करके एक साल का अनाधिकृत भुगतान ले लिया गया।

रायपुर कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कहा, बिना जांच के राशन दुकान का आवंटन नहीं किया जा सकता। मैं जानकारी लेता हूं कि किस आधार पर आवंटन किया गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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