00 नईदुनिया की कटिंग और शिकायत पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने कराई फोरेंसिक जांच

00 बरामद खाल और कैमरे में कैद बाघ की तस्वीर से हुई पुष्टि,

रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र में जिस बाघ की बरामद खाल को बार-बार वन विभाग ये इन्कार करता रहा कि ये खाल उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की है, लेकिन अब इनके और टाइगर रिजर्व के अफसरों के दावों को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने झूठा साबित कर दिया। बरामद खाल के फोरेंसिक और पूर्व में वन विभाग की फाइल में रखे गए बाघ की फोटो से मिलान करने के बाद आखिरकार पूरे मामले का पर्दाफाश हो गया है। बहरहाल मामूली धारा में जेल भेजे गए खाल की तस्करी करने के दो आरोपियों को जमानत मिल गई है, क्योंकि अभी तक शिकारी के रूप में इन्हें मानने में पुलिस और वन विभाग के अधिकारी इन्कार कर रहे थे। हैरत वाली बात है कि बाघों की गणना करने के लिए कैमरे में कैद तस्वीरों का ही सहारा लिए जाने का प्रावधान है। इन्हीं तस्वीरों में कैद बाघों के शरीर की धारियों के मिलान से ही पहचान होती है। इसके एक्सपर्ट टाइगर रिजर्व के अधिकारी और कर्मचारी भी हैं। इसके बावजूद उनकी दलीलें बरामद खाल के समय से ही ऐसी थीं, जो वन्य जीव एक्सपर्ट और जानकारों के गले नहीं उतर रही थी।

नईदुनिया की कटिंग व सबूत के साथ हुई थी शिकायत

टाइगर रिजर्व प्रबंधन बार-बार इसे ओडिशा से बाघ की खाल को यहां लाकर तस्करी की जाने का दावा करता रहा। इनके जिम्मेदारों की उदासीनता को देखते हुए वन्य जीव प्रेमी व एक्सपर्ट नितिन सिंघवी ने 17 फरवरी को इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण पत्र लिखा। इसमें वन विभाग की कार्यशैली पर कई प्रश्नचि- लगाए। इसके बाद जांच कमेटी बैठा दी गई।

एनटीसीए ने किया ये राजफाश

एनटीसीए ने राजफाश किया कि खाल उस बाघ की है, जो कि उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का था। यह नेशनल टाइगर डेटाबेस की उस फोटो से बाघ की खाल मैच खाती है, जो कि कुल्हाड़ीघाट रेंज की चंदोला बीट से एक वर्ष पूर्व 25 फरवरी 2017 से ली गई थी। वहीं इस प्रकरण में शिकायत करने उपरांत एनटीसीए के असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट नागपुर रीजन ने उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में 25 से 28 फरवरी 2018 को की गई जांच उपरांत पाया कि प्रकरण की जांच में प्रगति संतोषप्रद नहीं है। वन विभाग की कार्यप्रणाली पर असंतोष भी व्यक्त किया है।

ज्वलंत प्रश्न, जो विभाग को कठघरे में करते हैं खड़े

1-जब वन विभाग को मालूम था कि पुलिस वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम की धारा 55 के तहत कार्यवाही करने हेतु सक्षम नहीं है तो फिर पुलिस को जांच क्यों सौंपी गई।

2- क्यों पूरे समय वन विभाग के उधा अधिकारी यह कहकर गुमराह करते रहे कि पुलिस जांच कर रही है और बाघ की खाल ओडिशा से लाई गई है।

3-एनटीसीए द्वारा यह कहने के बावजूद की मुख्य वन्य जीव संरक्षक अधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करें, क्यों नहीं आधिकारिक बयान जारी किया गया।

4-वन विभाग को अब खुलासा करना चाहिए कि उसने आरोपी गणों को अपनी अभिरक्षा में लेकर वैसी पूछताछ की कि नहीं जैसा कि एनटीसीए ने सुझाया था। यह भी खुलासा करें कि आरोपीगण अभी कहां है या छूट गए हैं। सिंघवी ने बताया कि अगर धारा 55 के तहत कार्रवाई की गई होती तो अपराधियों को जमानत नहीं मिल सकती है।

वर्जन

इस गंभीर मामले में जांच करने के बाद दोषी अफसर और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।

- महेश गागड़ा, वन मंत्री,

21 मधुकर दुबे-05-बजे 9.25

सं. आरकेडी

Posted By:

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020