रायपुर (राज्य ब्यूरो)। वित्त विभाग ने राज्य के 20 निकायों को पत्र लिखकर उनके पास बचे बजट को सरकारी खजाने में जमा करने का निर्देश दिया है। इस आदेश को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आमने-सामने आ गए हैं। डा. रमन ने इस पत्र को लेकर सवाल किया है कि क्या सरकार दिवालिया हो गई है। वहीं, बघेल ने 2013 के ऐसे ही आदेश की कापी ट्वीट करते हुए डा. रमन की याददाश्त पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।

डा. रमन ने कहा कि शायद ही किसी राज्य में ऐसा होता हो कि निगम-मंडलों में इमरजेंसी के लिए जमा राशि को सरकार के के-डिपाजिट में जमा करने कहा जाए। तीन साल में 51 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज, फिर भी ये स्थिति। इस पर मुख्यमंत्री बघेल ने डा. रमन के कार्यकाल में वित्त विभाग की तरफ से भेजे गए इसी तरह के पत्र को ट्वीट करते हुए लिखा है कि चिंतित हूं, डाक्टर साहब! कहीं आप स्मृतिलोप के शिकार तो नहीं हो गए हैं? बता दें कि वित्त विभाग की विश्ोष सचिव शारदा वर्मा ने निकायों को उनके बैंक खातों में उपलब्ध अतिरिक्त राशि को सरकार के के-डिपाजिट में जमा करने के लिए कहा है। वित्त विभाग के अफसरों के अनुसार इस तरह का पत्र हर वर्ष वित्तीय वर्ष के अंत में जारी किया जाता है। यह सामान्य प्रक्रिया है।

इन निगम-मंडलों को पत्र

इनमें पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन, औषधीय पादप बोर्ड, बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, अक्षय उुर्जा विकास प्राधिकरण, सड़क विकास निगम, पाठ्य पुस्तक निगम, दिव्यांजगन वित्त एवं विकास निगम शामिल हैं। इसके साथ ही खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन, बेवरेज कार्पोरेशन, राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड, इंडस्ट्रियल डवलपमेंट कार्पोरेशन, मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन, पर्यटन मंडल, हथकरघा विकास निगम, समाज कल्याण बोर्ड, मिनरल डेवलपमेंट कार्पोरेशन और स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कार्पोरेशन भी शामिल हैं।

10 साल में दूसरी बार हो रहा

निगम-मंडलों के खातों में बची हुई राशि को सरकार के के-डिपाजिट में जमा करने का आदेश 10 साल में दूसरी बार हुआ है। इससे पहले 2013 में भी ऐसा ही आदेश जारी हुआ था, तब राज्य में भाजपा की सरकार थी। वित्त विभाग के अफसरों के अनुसार आर्थिक दबाव को कम करने और वित्तीय साख बढ़ाने के लिए ऐसा किया जाता है।

क्या है के-डिपाजिट

वित्त विभाग के अफसरों के अनुसार के-डिपाजिट एक ऐसा खाता है, जिसमें पैसा बिना किसी ब्याज लागत के रखा जाता है। यह सरकार की कर्ज चुकाने की क्षमता और वित्तीय साख को प्रदर्शित करता है

Posted By: Sanjay Srivastava

NaiDunia Local
NaiDunia Local