रायपुर। निजी बैंकों के शाखा प्रबंधकों पर अधिकाधिक व्यवसाय का दबाव होता है। वे अपनी-अपनी शाखा में अधिक व्यवसाय और लेन-देन दिखाने के लिए नियमों और दिशा-निर्देशों की सीमा लांघ जाते हैं। देश के विश्वसनीय सरकारी बैंकों की उपलब्धता के बावजूद निजी बैंकों के प्रति मोह, घोटाले और फर्जीवाड़े को अवसर प्रदान करता है।

एक्सिस बैंक में 16 करोड़ रुपये केफर्जीवाड़े में कोटक महेंद्रा बैंक के शाखाप्रबंधक की भी संलिप्तता निजी बैंकों की साख पर संदेह खड़े करती है। इससे पहले चंदा कोचर की अध्यक्षता वाले आइसीआइसीआइ बैंक पर भी इसी तरह के आरोप लगे थे। चंदा कोचर बड़ा नाम है, इसलिए यह मामला राष्ट्रीय फलक पर चर्चा में रहा है। इसके बावजूद निजी बैंकों के प्रबंधन में फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

यह ठीक है कि निजी बैंकों के शाखाप्रबंधकों पर अधिकाधिक व्यवसाय का दबाव रहता है, लेकिन वे सीमित संसाधनों में अपनी-अपनी शाखा में अधिक व्यवसाय और लेन-देन दिखाने के लिए नियमों और दिशा-निर्देशों की सीमा लांघजाते हैं। दूसरी तरफ देश के विश्वसनीय सरकारी बैंकों की उपलब्धताके बावजूद कुछसरकारी विभागों के अधिकारियोंऔर कर्मचारियों का निजी बैंकों के प्रति मोह, घोटाले और फर्जीवाड़े को अवसर प्रदान करता है।

रायपुर के एक्सिस बैंक की शाखा में चंद लोगों ने पहले बैंक के प्रबंधक से निकटता बढ़ाई। उन लोगों ने ही छत्तीसगढ़ राज्य कृषि मंडी को भी झांसे लिया। इसके बादमहज 20 दिनों में 16 करोड़ 40 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा कर लिया गया। कृषि मंडी के अधिकारी भले ही इस फर्जीवाड़े से अनभिज्ञ थे, लेकिन एक्सिस बैंक के शाखा प्रबंधक को पूरी साजिश की जानकारी थी।

मामला पुलिस के पास गया तो शाखा प्रबंधक से पूछताछ की गई, मगर उन्होंने पुलिस को जांच में सहयोग करने की जगह अनभिज्ञता जताई। फर्जीवाड़े में एक्सिस बैंक और कोटक महेंद्रा बैंक के शाखा प्रबंधकों की संलिप्तता का राजफाश तो हैदराबाद से गिरफ्तार किए गए आरोपितों ने किया। इसके बाद दो बैंकों के शाखा प्रबंधकों सहित सात आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। आरोपितों ने साठगांठ कर एक्सिस बैंक में राज्य कृषि मंडी के 60 करोड़ रुपये जमा कराए थे।

इसके लिए फर्जी तरीके से चेक बुक जारी करवाई थी और कृषि मंडी बोर्ड का फर्जी पत्र भी तैयार किया गया था। इसके माध्यम से 16 करोड़ 40 लाख 12 हजार 655 की रकम स्थानांतरित की गई। यह रकम 11 अलग-अलग खाते में डाली गई। जब मंडी बोर्ड को शक हुआ तो उसने इसकी शिकायत बैंक से की। जांच में पता चला कि फर्जी पत्र के सहारे पैसे स्थानांतरित किए गए हैंं।

इसके बाद बैंक ने मंडी बोर्ड को पूरी रकम लौटाई और थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। इस मामले में आरोपितों की निशानदेही पर 38 लाख रुपये जब्त किए गए हैं, जबकि अलग-अलग खाते में जमा 98 लाख रुपये को संबंधित बैंकों को अलर्ट कर होल्ड कराकर रिवर्स कराने की प्रक्रिया की जा रही है।

आरोपितों से अब तक 1.22 करोड़ 95 हजार रुपये बरामद किए जा चुके हैं। इस मामले के अन्य आरोपितों को गिरफ्तार करने और गबन की राशि बरामद करने के लिए पुलिस टीमें दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों की खाक छान रही हैं। इस मामले में निजी बैंकों की कार्यप्रणाली जहां संदेह के घेरे मेंहै, वहीं सरकारी बैंक विश्वसनीयता बनाए हुए हैं।

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