सब हेडिंग- 12 करोड़ रुपये के काम करने के अनुभव को कर दिया नौ करोड़, फिर भी मामला अटका

बार-बार बदले नियम, इसके बाद भी तय नहीं कर पाए ठेकेदार

23 संदीप 03 समय 1ः20 बजे -संतोष

नईदुनिया फोकस

रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

आम आदमी की प्रापर्टी यानी रजिस्ट्री के दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की योजना पर दीमक लगती जा रही है। राज्य सरकार ने रजिस्ट्री के दस्तावेजों की स्कैनिंग और इंडेक्सिंग के काम को ठेका कंपनी को देने के लिए एक साल पहले निविदा जारी की। तब से अब तक तीन बार निविदा की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है पर ठेका नहीं दिया जा सका है। शिकायत है कि एक चहेते ठेकेदार को काम देने के लिए बार-बार शर्तें बदली जा रही है। सेंट्रल विजिलेंस कमिशन की गाइड लाइन में भी छेड़छाड़ की गई है। शर्त के मुताबिक ठेकेदार के पास 15 करोड़ का 80 प्रतिशत यानी 12 करोड़ रुपये के कार्य का अनुभव होना अनिवार्य है। इसके बाद भी अफसरों ने इसे घटाकर नौ करोड़ रुपये कर दिया है। अफसरों का तर्क है कि योग्य व्यक्ति नहीं मिलने के कारण नियम और शर्तों को बदला जा रहा है।

सूत्रों की मानें तो निविदा के दौरान एक मेसर्स एप्टेक नामक फर्म की एकल निविदा मिली थी पर इस फर्म को दूसरी योग्यता यानी ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट की योग्यता नहीं होने का हवाला देकर बाहर कर दिया था। तीन निविदाओं के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो अब चौथी निविदा निकालने की तैयारी है। दावा था कि रजिस्ट्री के लिए दफ्तर तक कोई दस्तावेज लेकर नहीं जाना पड़ेगा। डिजिटल लॉकर से ही कॉपी मिल जाएगी।

क्या होगा ई-गवर्नेंस की योजना का ?

शासन ने ई-गवर्नेंस की पहल करते हुए रजिस्ट्रियों के समस्त दस्तावेजों को स्कैन करके एक साल के भीतर ऑनलाइन करने का दावा किया था। वेबसाइट पर प्रापर्टी के दस्तावेज अपलोड नहीं होने से पटवारियों और राजस्व अधिकारियों के आगे-पीछे चक्कर लगाना लोगों की मजबूरी बन गई है। तहसील के रिकार्डों को लंबे समय से सुरक्षित रखने के लिए कई तरह के उपाय किए जा रहे हैं। इसके बाद भी दस्तावेजों को दीमक चट कर रही है।

इस तरह चला निविदा का लगातार खेल

पहली निविदाः इस प्रक्रिया में पंजीयन विभाग के पास 15 फर्म सामने आए थे।

निष्क र्षः किसी को काम नहीं दिया गया, बताया गया कि कोई योग्य नहीं था।

दूसरी निविदाः शुरू में ऐसे फर्मों को काम देने के लिए शर्त रखी गई थी जिन्हें 15 करोड़ रुपये का काम करने का पूरा अनुभव हो, निविदा निरस्त कर दी।

निष्कर्षः दूसरी निविदा में जितने फर्म आए उन्हें इतनी रकम का काम करने का अनुभव नहीं होना बताया गया, निविदा निरस्त कर दी।

तीसरी निविदाः सेंट्रल विजिलेंस कमिशन की गाइड लाइन को शिथिल करके 15 करोड़ का 80 प्रतिशत यानी 12 करोड़ रुपये के कार्य के अनुभव की योग्यता को हटाते हुए नौ करोड़ रुपये कर दिया गया। अब 15 जिलों के काम का अनुभव दे दिया गया।

निष्कर्षः तकनीकी निविदा में दिक्कत है इसलिए यह निविदा भी पूरी नहीं हो सकती है।

वर्जन

तीसरी बार निविदा की गई थी। इसमें कुछ तकनीकी दिक्कत है। इसलिए ठेका नहीं हो पाया है। हमने काम कराने के लिए ही नियमों को शिथिल किया है। - धर्मेश साहू, महानिरीक्षक , पंजीयक , छत्तीसगढ़

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Posted By: Nai Dunia News Network

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