रायपुर। उत्तर छत्तीसगढ़ से इन दिनों मानव-हाथी द्वंद्व में सिलसिलेवार लोगों की मौत की खबर आ रही है। इन घटनाओं का आरोप सीधे गणेश नाम के जंगली हाथी पर लगाया जा रहा है।

वन विभाग के कुछ अधिकारियों का मानना है कि उत्तर छत्तीसगढ़ में सक्रिय हाथी दलों में गणेश सबसे हिंसक है, और इसने अब तक 19 लोगों की जान ली है। हालांकि इस बात की कोई पुष्टि नहीं कर रहा कि गणेश ने ही इन घटनाओं को अंजाम दिया है। एक दिन पहले घरघोड़ा क्षेत्र में एक ट्रेलर का शीशा तोड़कर हाथी ने ड्राइवर को बाहर निकाला और उसे रौंदकर मौंत के घाट उतार दिया।

कहा जा रहा है कि इस घटना को भी गणेश ने ही अंजाम दिया है। वहीं कुछ वन्यजीव प्रेमियों का तर्क है कि जिस तरह किसी सिलसिलेवार घटना की जांच में नाकामी पर पुलिस एक संदेही के मत्थे आरोप मढ़ देती है, ठीक उसी तरह गणेश के साथ भी हो रहा है। बता दें कि यह हाथी काफी हिंसक है और कुछ घटनाओं को अंजाम देने के बाद वन विभाग ने इसे कैद कर लिया था, लेकिन वह बेड़ियां तोड़कर कैद से भाग निकला था।


कोरबा में 58 हाथियों के झुंड विचरण करते दिखे

विभागीय जानकारी के अनुसार वर्तमान में कोरबा कटघोरा वन मंडल में 58 हाथियों का झुंड विचरण कर रहा है। इस झुंड में सबसे तेज गणेश नामक हाथी का कसूर इतना है कि वह कथित रूप से उत्पाती है। वन विभाग के कब्जे में होने के दौरान गणेश जंजीर तोड़कर फरार होने में सफल हो गया था। इसे देखते हुए इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्ल्यूआइआइ) के आदेश के बाद विभाग के अधिकारियों ने गणेश को फिर से पकड़ रेडियो कॉलर लगाकर उसे जंगल में छोड़ दिया। वहीं बारिश के बाद इसे फिर से पकड़ने का प्लान बन रहा है।


वास्तविक सत्यापन हो

वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी का कहना है कि गणेश के विचरण क्षेत्र में कोई घटना होती है तो गणेश के ऊपर हत्या का आरोप लगाने का फैशन बन गया है। 19 लोगों को मौत के घाट उतारने का आंकड़ा पूर्णत झूठा है। जितने भी मरे हैं उसका वास्तविक सत्यापन होना चाहिए।

इनका कहना है

गणेश हाथी ने पिछले 19 दिन में दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। बरसात के बाद उसे दोबारा रेस्क्यू करने का प्लान बनाया जाएगा।

अतुल शुक्ला, पीसीसीएफ, छत्तीसगढ़

Posted By: Hemant Upadhyay