रायपुर। Gasht Point Column: राजधानी रायपुर में इन दिनों एफआइआर पर एफआइआर का खेल चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कथित टिप्पणी करने के मामले में कांग्रेसियों की शिकायत पर टीवी पत्रकार अर्णब गोस्वामी के खिलाफ प्रदेश में 101 एफआइआर हुई। फिर टूलकिट मामले में पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह व भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा और अब एलोपैथी डाक्टरों के खिलाफ टिप्पणी करने पर योग गुरु रामदेव बाबा पर एफआइआर।

अब इन एफआइआर पर आगे क्या कार्रवाई होगी, इस बारे में पुलिस अफसर कुछ कहने से बच रहे हैं। वैसे पुलिस का इस्तेमाल हर सत्ताधारी अपने-अपने तरीके से करता है। एक समय मेें भाजपाइयों ने विरोधियों को निपटाने के लिए कई नेताओं के खिलाफ एफआइआर कराई थी। अब मौका कांग्रेस को मिला सो वह भी इस काम मेें पीछे नहीं रही। अब इन सब राजनीतिज्ञों के बीच पिस रही है तो केवल पुलिस।

झीरम घाटी पर आइपीएस का संस्मरण

बस्तर का झीरम कांड भला कौन नहीं जानता। छत्तीसगढ़ की छाती पर यह घाव हमेशा हरा ही रहेगा। झीरम के घाव को लेकर आइपीएस डा. लाल उमेद सिंह ने बस्तर की अपनी यात्रा के प्रसंग को शब्दों में ढाला है। उन्होंने लिखा- कहते हैं, अतीत अगर अच्छा है तब भी आपके साथ रहता है और अगर दुखद है तब भी आपको कुछ सोचने-समझने के लिए विवश कर देता है। आज भी कुछ ऐसा ही हुआ।

बस्तर में अपने कर्तव्य निर्वहन के दौरान कई यादें अचानक ताजा हो गईं। बस्तर दौरे के दौरान रास्ते के बहुत से हरे-भरे मनमोहक दृश्यों से वास्ता तो पड़ा, लेकिन जैसे ही गाड़ी दरभा की ओर बढ़ी, वैसे ही मन भारी होते चला गया। इस घाटी को नक्सली हमले की वजह से ही याद किया जाता है। यहां से गुजरते हुए मन में एक खास तरह की बेचैनी कायम थी।

काम का पैसा लेने वाले पटवारी पर गाज

जांजगीर जिले के एक किसान से काम के बदले रिश्वत मांगने वाले पटवारी गुलजार सिंह आखिरकार नप गए। हर काम का निर्धारित दर बताते हुए कैमरे में कैद पटवारी की हरकतें इंटरनेट मीडिया में वायरल होते ही हंगामा मच गया। वीडियो में पटवारी एक किसान से बोल रहे थे कि बिक्री छांट के चार हजार और मौके का मुआयना करने पर तीन हजार रुपये और लगेगा।

किसान ने जब एडवांस देना चाहा तो पटवारी ने कहा कि जब कोई काम ही नहीं किया तो पैसे कैसे ले लूं। जब काम करूंगा, तभी पैसे भी ले लूंगा। पटवारी के अवैध वसूली की शिकायत लगातार अफसरों तक पहुंच रही थी, लेकिन कहते हैं न कि सबका बंधा था। इसलिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी। लेकिन किसान ने वीडियो वायरल क्या कर दिया, अपना दामन बचाने को जिम्मेदार अफसरों को कार्रवाई करनी पड़ गई।

आइपीएस को है इंतजार

आइएएस अफसरों के तबादले के बाद आइपीएस अफसरों को उम्मीद थी कि अब उनकी तबादला सूची जारी होगी। लेकिन अब तक इस पर फैसला नहीं हुआ। तबादले के दायरे में छह से दस जिलों के एसपी, डीआइजी, आइजी स्तर के अफसर आ रहे हैं। पुलिस मु्ख्यालय में चर्चा है कि कुछ अफसरों की पदोन्न्ति की कवायद चल रही है। इसके बाद ही तबादले पर अंतिम मुहर लगेगी।

कुछ आइजी पदोन्नत होकर एडीजी बनेंगे, लिहाजा उनके खाली स्थान को भी भरना होगा। सूत्र बताते हैं कि कई जिलों के एसपी को हटाकर उनके स्थान पर बटालियन और मुख्यालय में पदस्थ अनुभवी अफसर को मौका दिया जाएगा। रायपुर एसएसपी अजय यादव का नाम भी इसमें शामिल है। बिलासपुर से प्रशांत अग्रवाल को रायपुर लाने की चर्चा है। अंबिकापुर में डा. लाल उमेद सिंह, बेमेतरा में राजेश अग्रवाल व बलौदाबाजार में विजय अग्रवाल को पदस्थ किया जा सकता है।

Posted By: Azmat Ali

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