रायपुर। Gash‍t Point Column: कोरोना संकटकाल में परेशान लोगों की जान बचाने को अब वर्दी वाले भी सामने आने लगे हैं। राजधानी में पुलिस परिवार तो धमतरी में प्रशिक्षु डीएसपी समेत दो आरक्षकों ने अपना प्लाज्मा दान कर मानवता का संदेश दिया है। प्रशिक्षु डीएसपी रागिनी तिवारी समेत दो आरक्षक महेंद्र प्रताप सोरी और ब्रह्मानंद कुंजाम ने एक साथी को प्लाज्मा डोनेट करने रायपुर जाने एएसपी मनीषा ठाकुर से अनुमति मांगी।

अनुमति मिलने के बाद पुलिसकर्मियों ने रायपुर आकर अपना प्लाज्मा कोरोना पीड़ित को दान किया। कोरोना के कहर में आक्सीजन, वेंटिलेटर, इंजेक्शन, दवाइयों के साथ प्लाज्मा का अलग ही महत्व है। पुलिस अफसरों का कहना है कि स्वेच्छा से प्लाज्मा डोनेट करने सभी को प्रेरित किया गया था। विभाग में जनसेवा का ही महत्वपूर्ण स्थान है। हर संकट के समय में आम जनमानस के साथ पुलिस जवान खड़े हैं, मुश्किल वक्त में काम आना ही इंसान की सच्ची सेवा है।

कोरोना ने रिश्ते को किया तार-तार

पूरा देश कोरोना संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। संकट की इस घडी में अनजान हाथ लोगों के मदद के लिए आगे आ रहे हैं। खाना-पानी, आक्सीजन और यहां तक कि अंतिम सफर में भी लोग साथी बन रहे हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में अपनों में ही संक्रमण का मामला सामने आया है। दरअसल बिलासपुर के सिम्स में कोरोना से जूझ रही सात माह की बच्ची की मौत की घटना ने रिश्ते को तार-तार कर दिया। बच्ची के शव को माता-पिता छोड़कर भाग निकले। प्रशासन की टीम उनके मस्तूरी इलाके के पचपेढ़ी गांव तक भी गई लेकिन वहां भी घर में ताला लगा मिला। स्वजनों को शव सौंपने अस्पताल प्रबंधन इंतजार करता रहा, लेकिन कोई नहीं आया। आखिरकार प्रशासन को अंतिम संस्कार कराना पड़ा। इस घटना के बाद लोग यह कहने लगे है कि हे भगवान..कोरोना जो न दिखाएं वह कम है।

जेल की चारदीवारी में घुसा कोरोना

कोरोना की दूसरी लहर से प्रदेश के जेलों में बंद कैदी सिहर रहे हैं। रायपुर और दुर्ग केंद्रीय जेल के पांच कैदियों की कोरोना से मौत हो चुकी है, वहीं 70 से अधिक कैदी संक्रमित हो चुके हैं। यह तब है जब जेल में ले जाने से पहले कैदियों का बाकायदा कोरोना टेस्ट किया जा रहा है। जेल की चहारदीवारी को भेद कर घुसे कोरोना ने हालात बिगाड़ दिया है। इसे देखते हुए फिर से कैदियों को पैरोल, जमानत पर छोड़ने की चर्चा छिड़ गई है।

कैदियों के स्वजन भी मांग कर रहे हैं। कोरोना का कहर केवल कैदियों पर ही नहीं बल्कि जेल प्रहरियों पर भी टूट रहा है। जेल डीआईजी भी खुद होम आइसोलेशन में हैं। एहतियात के तौर पर नव प्रवेशी बंदियों को एंटीजन टेस्ट निगेटिव आने के बाद ही जेल में प्रवेश दिया जा रहा है, फिर आरटीपीसीआर टेस्ट की रिपोर्ट आने तक ऐसे बंदियों को अलग बैरक में रखा जा रहा है।समस्या यह है कि आरटीपीसीआर रिपोर्ट लेट आने से कई कैदियों की तबियत बिगड़ रही है।

इनकी करतूत से खतरे में जान

समाज में इंसानियत को शर्मसार करने वाले लोगों की कमी नहीं है। चंद पैसों के लालच में लोग इतना नीचे तक गिर जाएंगे, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। आपदा को अवसर मानकर नकली दवा,पानी मिला सैनिटाइजर, रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी से लेकर फर्जी कोरोना रिपोर्ट देने का का भांडाफोड़ हो चुका है। राजधानी से लगे मंदिर हसौद इलाके में फर्जी कोरोना रिपोर्ट देने वाले लैब टेक्निशियन रेशम मंगेशकर पुलिस के हत्थे चढ़ा तो उसने सैकड़ों लोगों से पैसे लेकर घर बैठे फर्जी कोरोना रिपोर्ट रिम्स अस्पताल के नाम पर बनाकर देना कुबूल किया।

इसकी इस करतूत से अनेक लोगों ने अपनी जान गंवा दी। जबकि शैलेंद्रनगर इलाके में नकली सैनिटाइजर बनाने वाले बाप-बेटे को औषधि विभाग ने रंगे हाथ पकड़ा। पूछताछ करने पर पता चला कि ये लोग सैनिटाइजर में पानी मिलाकर दोगुना मुनाफा कमा रहे थे। इनके सैनिटाइजर पर भरोसा कर कई लोग संक्रमित भी हो गए होंगे और कुछ लोगों की मौत से भी इन्‍कार नहीं किया जा सकता, मगर इन्हें तो मुनाफे से मतलब था।

Posted By: Azmat Ali

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