रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

राज्य सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर अंकुश लगाने का बेहतर निर्णय लिया है, पर डर है कि यह कागजों तक ही न रह जाए। तीन महीने के भीतर फीस विनियामक समिति बन जानी चाहिए। निजी स्कूलों की फीस का निर्धारण भी स्कूलों की अधोसंरचना, शिक्षक की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता के आधार पर होना चाहिए। शिक्षाविद्, प्रबुद्धवर्ग इस समिति में हों। ऐसे लोगों को रखा जाए, जो निष्पक्षता और पारदिर्शता के साथ फीस का निर्धारण करें। बच्चों और पालकों से उतनी ही फीस ली जाए, जितनी वहां सुविधा दी जाती है।

यह कहना है पालकों, छात्र नेताओं और प्रबुद्धजनों का। शुक्रवार को नईदुनिया दफ्तर में सरकार के स्कूल फीस के लिए फीस विनियामक समिति गठित करने के निर्णय पर संवाद कार्यक्रम रखा गया। सभी ने कहा कि प्रदेश सरकार के इस कदम का हम स्वागत करते हैं। हमारे देश में जो शिक्षा नीति लागू है, उसमें शिक्षा को व्यवसाय बना दिया गया है। प्रदेश और देश का प्रत्येक व्यक्ति अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना चाहता है, ताकि उसका भविष्य बने, लेकिन सरकारी शिक्षा की बुरी हालात ने निजी शिक्षा को बढ़ावा दिया। आज हालत यह है कि निजी शिक्षा लोगों को लूटने का साधन बन गई है। हमारे प्रदेश और शहर में कुछ निजी स्कूल ऐसे हैं, जो नर्सरी की पढ़ाई की ही हजारों से लाखों रुपये फीस ले लेते हैं। ऐसे में फीस का गठन एक अच्छा कदम है। इसमें शिक्षाविदों,जन प्रतिनिधियों, पत्रकारों, छात्र संगठन के प्रतिनिधियों समेत अन्य आवश्यक लोगों व प्रशासनिक अधिकारियों को रखा जाना चाहिए।

खर्च के अनुरूप फीस हो तय

राज्य शासन के फीस नियामक समिति बनाने के निर्णय का स्वागत करता हूं। इसमें उम्मीद है कि सरकार प्रबुद्धजनों, सीए ,लॉ के जानकार और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कमेटी बनाएगी। इसमें निजी स्कूल प्रबंधकों का भी प्रतिनिधि हो, ऐसी संरचना होनी चाहिए। हम भी चाहते हैं कि सरकार हमारे खर्च के अनुरूप फीस तय करे। निजी स्कूलों में गुणवत्तायुक्त शिक्षा और सुविधा के लिए फीस ली जाती है। स्कूलों को सिर्फ पैसों से न तौला जाए।

- राजीव गुप्ता, सचिव, प्राइवेट मैनेजमेंट एसोसिएशन

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सुविधा के अनुसार एमआरपी तय हो

हर चीज की एक एमआरपी होती है, लेकिन अभी तक निजी स्कूलों की फीस के लिए कोई एमआरपी नहीं थी। इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में फीस निर्धारित होती है। स्कूलों में भी सुविधा के अनुसार फीस निर्धारित हो। स्कूल हर साल ऑडिट रिपोर्ट नहीं देते हैं। नो-प्रॉफिट और नो लॉस के मेथड के अनुसार आरटीई के नियमों का पालन होना चाहिए। -डॉ. कीर्ति चावड़ा, सचिव, छत्तीसगढ़ पालक एसोसिएशन

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पारदर्शी हो फीस तय करने की प्रक्रिया

सरकार का एक सर्कुलर है कि फीस तय करते वक्त सरकार का एक प्रतिनिधि भी होगा, लेकिन उन नियमों का पालन नहीं हुआ। सरकार ने खुद हाईकोर्ट में कहा कि हम निजी स्कूल की फीस नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, अब जब कमेटी बनाई जा रही है तो इसमें स्पष्टता तो होनी ही चाहिए। फीस तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए। - किस्टोफर पॉल, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पालक एसोसिएशन

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छात्रों का भी प्रतिनिधित्व हो

फैसले का स्वागत करता हूं। निजी शिक्षा लोगो को लूटने का साधन बन गई है। प्रदेश और शहर में कुछ निजी स्कूल ऐसे हैं, जो नर्सरी की पढ़ाई की ही हजारों से लाखों रुपये फीस ले लेते हैं। निजी शिक्षा केंद्रों के लिए फीस नियामक समिति का गठन एक अच्छा कदम है। इसमें शिक्षाविदों,जन प्रतिनिधियों, पत्रकार, छात्र संगठन के प्रतिनिधियों सहित अन्य आवश्यक लोगों व प्रशासनिक अधिकारियों को रखा जाना चाहिए। - शुभम साहू, संयोजक, छत्तीसगढ़ नागरिक अधिकार समिति

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सुविधाएं भी सार्वजनिक हों

पालकों के लिए समिति अभी भी बनाई जाती है, लेकिन यही नहीं पता चल पाता है कि उस समिति में पालक की ओर से कौन है। मुझे लगता है कि जो भी स्कूल फीस लेते हैं, वे किस हिसाब से ले रहे हैं। किस पर कितना अहम मानकर ले रहे हैं। ज्यादातर स्कूलों में मनमानी फीस लेकर पालकों की जेब काटी जा रही है, जल्द से जल्द पालकों के हित में फीस समिति गठित हो जानी चाहिए। - सौरभ सोनी, जागरूक पालक संघ

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सामाजिक कार्यकर्ता तय करें फीस

यदि सरकार फीस विनियामक समिति बनाना चाहती है तो इसे गंभीरता से ले। इसमें सिर्फ कागज पर खानापूर्ति न हो। जिस तरह से पिछली सरकार ने इंजीनियरिंग और मेडिकल के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी, उसी तरह स्कूलों की फीस तय करने के लिए कमेटी हो। इसमें पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता आदि होने चाहिए। - ऋषभ ओगरे, जिला संयुक्त सचिव रायपुर, एबीवीपी

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लूट हो खत्म, फीस लें वाजिब

फीस के कारण कई बार गरीब वर्ग के लोग अपने बच्चों को नहीं पढ़ा पाते हैं। सरकारी स्कूलों को भी सरकार मजबूत करे। नर्सरी के बच्चों से मोटी फीस ली जा रही है। निर्णय ठीक है, लेकिन इसके पालन करने के लिए पालक, स्कूल प्रशासन को सहयोग देना होगा। कीमत तो तय होनी ही चाहिए। -उद्देश्य कुमार खांडेकर, दक्षिण संयोजक रायपुर, एबीवीपी

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बेहतर फैसला

स्कूलों की मनमानी फीस पर लगाम लगाने के लिए सालों से मांग थी। भूपेश सरकार ने बेहतर फैसला लिया है। इसका मैं स्वागत करता हूं। जिस तरह से इसे केबिनेट में पास किया, उसी तरह से जल्द से जल्द इसे जमीन पर लाने के लिए काम करना चाहिए। फीस हर घर से जुड़ा मुद्दा है। इस फैसले का मैं स्वागत करता हूं। - ईश्वर साहू, कॉलेज छात्र

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फीस ही नहीं और भी कई मुद्दे

यह समिति फीस के निर्धारण का कार्य तो करे ही इसके साथ ही निजी स्कूलों में पढ़ाए जा रहे गैर जरूरी पाठ्यक्रमों को भी प्रतिबंधित करे। यह समिति अपनी तरह से एक पावर कमेटी होना चाहिए। जो नियमों का पालन न करे, उसकी मान्यता खत्म कर दी जाए। आज स्कूल परिसर में न सिर्फ फीस, बल्कि ड्रेस और किताबें तक मनमानी बेची जा रही है, जो दूसरे जगहों पर नहीं मिलती है। -लीलाराम साहू, कॉलेज छात्र