रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में आरक्षण के खाके को लेकर कैबिनेट में प्रस्ताव तैयार होने के बाद राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आदिवासी आरक्षण के पक्ष में बड़ा बयान दिया है। उइके ने कहा कि विधानसभा के विशेष सत्र में आरक्षण विधेयक पास होने के बाद वह उसे तत्काल मंजूरी देंगी। आरक्षण को लेकर विधानसभा का विशेष सत्र एक-दो दिसंबर को आयोजित किया गया है। राज्य सरकार सत्र में आरक्षण को लेकर दो विधेयक पेश करने जा रही है। राज्यपाल का यह बयान सरकार के प्रवक्ता और मंत्री रविंद्र चौबे के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि विधानसभा में विधेयक पास होने के बाद हम राज्यपाल के पास जाएंगे और विधेयक को स्वीकृति देने का आग्रह करेंगे।

राज्यपाल उइके ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी और बाकी वर्गो के हितों के लिए मैंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा था। अब विशेष सत्र में सरकार आदिवासियों के हित मे ही निर्णय लेगी। सदन में सबकी सहमति से आरक्षण पर चर्चा होगी। राज्यपाल ने कहा कि आरक्षण पर मेरा पूरा समर्थन है। मैं संवैधानिक पद हूं और प्रदेश के हित में फैसला लेते हुए विधेयक को तत्काल मंजूरी दूंगी। गौरतलब है कि कैबिनेट में अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 32, अनुसूचित जाति (एससी) 13, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को चार प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

आबादी के आधार पर एसटी-एससी का आरक्षण मान्य: कांग्रेस

राज्य सरकार के प्रवक्ता रविंद्र चौबे ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को आबादी के आधार पर आरक्षण दिया जा सकता है। इसका संविधान में प्रविधान है। ओबीसी के आरक्षण को लेकर सरकार ने क्वांटिफाइबल डाटा आयोग की रिपोर्ट को आधार माना है। कोर्ट ने कहीं भी यह नहीं कहा है कि किस वर्ग को कितना आरक्षण देना है। कोर्ट ने आधिकारिक डाटा की बात कही है, इसके लिए आयोग की रिपोर्ट बेसलाइन होगी। विधानसभा में विधेयक पेश होने के बाद कोर्ट भी इसे स्वीकार करेगा। प्रतिपक्ष भी सर्वसम्मति से विधेयक को पास कराए। चौबे ने कहा कि सदन में चर्चा के दौरान यह सामने आएगा कि भाजपा ने आरक्षण के लिए क्या किया। भाजपा ने जनसंख्या के आधार पर आरक्षण की कभी बात नहीं कहीं। चौबे ने चंद्राकर के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष हर चीज को चुनाव से जोड़कर देखता है।

आरक्षण नहीं, चुनाव को लेकर हड़बड़ी: भाजपा

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता व पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि प्रस्तावित आरक्षण के संशोधन विधेयक को पढ़ेंगे के बाद निर्णय लेंगे। चंद्राकर ने कहा कि जो वातावरण बन रहा है, उसमें सवाल यह है कि जो आरक्षण 58 प्रतिशत था, क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट में उसे बहाल कराने जा रही है। अब 76 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए बात कर रहे हैं, जो देश में सर्वाधिक होगा। तो क्या सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को वापस लेंगे। आरक्षण पर कांग्रेस कन्फ्यूज है। ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण देना था, अब चार प्रतिशत देने की बात आ रही है। विधानसभा में एक दिन में ही सब कुछ करेंगे। एक दिन में आरक्षण पारित करने के लिए हड़बड़ी क्यों है, यह सभी जानते हैं। भानुप्रतापपुर के विधायक मनोज मंडावी की मृत्यु नहीं हुई होती, चुनाव नहीं होता तो सरकार विशेष सत्र नहीं लाती।

Posted By: Abhishek Rai

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