श्रीशंकर शुक्ला। रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी के संजय नगर का आंगनबाड़ी केंद्र बिलकुल बदल गया है। यहां भोजन की गुणवत्ता बढ़ गई है। बच्चों को रुचिकर लगे, इस स्तर पर पढ़ाई कराई जा रही है। खेलने के लिए ढेर सारे खिलौने आ गए हैं। कूलर भी लग गया है। बड़ी फीस लेकर सुविधाएं देने वाले प्ले स्कूलों से भी यह आकर्षक और सुविधा संपन्न् बन गया है। यह सब संभव हो पाया जीएसटी अधिकारी नेम सिंग साहू के संकल्प से। जिंदगी के हर चढ़ाव-उतार को बेटा बचपन से ही देख और समझ सके, इसलिए उसे दाखिला दिलाने वे आंगनबाड़ी पहुंचे थे, लेकिन उसके भवन की दुर्दशा देख उन्हेांने अपने खर्च पर उसे संवार दिया।

जीएसटी विभाग में एडिशनल डायरेक्टर नेम सिंग पत्नी और बेटे के साथ जब आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे तो वहां पंखा था न कूलर। छत जर्जर नजर आई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से बात की तो पता चला कि बच्चे केवल भोजन करने आते हैं, क्योंकि यहां कोई सुविधा नहीं है।

नेम सिंग कहते हैं कि वहां की अव्यवस्था देख वे बिचके नहीं, बल्कि उसे सुधारने और संवारने का संकल्प लिया, ताकि यहां आने वाला हर बच्चा बेहतर माहौल में शिक्षा हासिल कर सके। केंद्र सरकार की योजना स्वच्छता एक्शन प्लान के तहत इसे गोद लिया और सारी सुविधाएं जुटवा दीं।

नेम सिंह कहते हैं कि वे भी गांव में पढ़े हैं। अभावों को समझते हैं। इसलिए तय किया कि बेटे की पढ़ाई की शुरुआत प्ले स्कूल नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी कराएंगे। आंगनबाड़ी केंद्र की शिक्षिका विजया राय ने बताया कि जब से आंगनबाड़ी केंद्र में सुविधाएं बढ़ीं हैं, बच्चे घर जाना ही नहीं चाहते। पहले तो भोजन करने के लिए घर से बुलाकर लाना पड़ता था।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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