Guru Purnima 2020 : रायपुर। वैसे तो हर बच्चे के पहले गुरु, स्वयं माता-पिता होते हैं, वे ही अपने बच्चों को बोलना, चलना, खाना-पीना, दैनिक दिनचर्या के सारे महत्वपूर्ण काम करना सिखाते हैं। इसके बाद बच्चे स्कूल, कॉलेज के गुरुजनों से शिक्षा हासिल करके अपना कैरियर संवारते हैं। इसके विपरीत कुछ माता-पिता ऐसे भी हैं जो सही मायने में अपने बच्चों के असली गुरु भी हैं। अपने माता-पिता द्वारा सिखाए गए हुनर के दम पर बच्चे अपने साथ अपने माता-पिता का नाम भी रोशन कर रहे हैं। स्कूल में भले ही अन्य गुरुजनों से वे शिक्षा ले रहे हैं लेकिन माता-पिता द्वारा दी जा रही शिक्षा को ही उन्होंने फिलहाल अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है।

भाई दिव्यांस और बहन कावेरी, पिता से ले रहे संगीत की तालीम

बूढ़ापारा में रहने वाले भाई दिव्यांश और बहन कावेरी व्यास को संगीत में गहरी रुचि है। उनके पिता दीपक व्यास एक जाने-माने संगीतज्ञ हैं। बच्चों का संगीत के प्रति लगाव देखकर उन्होंने संगीत का प्रशिक्षण लेने संगीत महाविद्यालय भेजना चाहा। बच्चों ने मना कर दिया कि वे संगीत सीखेंगे तो पिता से ही सीखेंगे। बच्चों की लगन देखकर पिता ने उनके लिए समय निकालना शुरू किया। प्रतिदिन अपने दोनों बच्चों को दो घंटे तक संगीत सिखाते हैं। आज उनके बच्चे ढोलक, हारमोनियम, गिटार, तबला बजाना सीख चुके हैं। साथ ही शास्त्रीय राग-गायन में प्रवीण हो चुके हैं। दोनों बच्चों का कहना है कि वे यदि संगीत स्कूल जाते तो उन्हें वह ज्ञान नहीं मिल पाता, जो उनके पिता से मिला है।

मंच पर राग में कविता बोलना मां ने सिखाया

कवयित्री शालू सूर्या चाहती थीं कि उनकी दोनों बच्चियां पढ़-लिखकर अफसर बनें। इसके विपरीत मां को मंच पर कविता पढ़ते देखकर बेटियां लक्ष्या और भव्या के मन में भी कविता लिखने-पढ़ने का भाव जागा। पांच साल की उम्र से ही बच्चियां दो-दो, चार-चार लाइन की कविता लिखने लगीं। टूटी-फूटी भाषा में लिखी गई कविताओं को मां ठीक करतीं और फिर उन्हें लयबद्ध तरीके से बोलना सिखातीं। कुछ ही सालों में अब दोनों बच्चियां पूरे आत्मविश्वास से मंच पर जब काव्य पाठ करतीं हैं तो तालियां गूंज उठती हैं। कम उम्र में ही बड़े शहरों के मंचों पर सम्मान मिलने लगा है। दोनों बच्चियों का ख्वाब है कि वे बड़ी होकर देश-विदेश में कविता के जरिए नाम कमाएं। मां ने असली गुरु की तरह कविता में अच्छे शब्दों का चयन करना, अलंकार, छंद, व्याकरण की त्रुटियों को ठीक करने का ज्ञान देकर आज अपनी बच्चियों को एक मुकाम पर लाकर खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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