संदीप तिवारी। रायपुर। सेवा भारती और वनवासी कल्याण आश्रम प्रदेश में वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए अनूठा अभियान चला रहा है। इसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक व समाजसेवी जन्मदिन, सालगिरह और शादियों में होने वाले खर्च में बचत कर उस राशि को परोपकार के इस कार्य के लिए दान कर रहे हैं। इस पैसे से संस्कारशाला चलाई जा रही है।

वसुधैव कुटुंबकम, यानी सारी धरा के लोग मेरा परिवार, मैं और मेरा परिवार अलग नहीं। किसी की जरूरत को पूरा करने के लिए अपनी खुशियों को बांटने से बड़ा कोई परोपकार नहीं हो सकता। स्वयंसेवक इसे सूत्र वाक्य के रूप मेें उपयोग कर रहे हैैं। उनका मानना है कि अपनी खुशियों में थोड़ी कटौती कर हम बहुतों की मदद कर सकते हैं। बेटे-बेटियों के विवाह पर होने वाला खर्च कम कर वे समाज के सामने मिसाल भी पेश कर रहे हैं।

केस-01

शादी में पान और आइसक्रीम के स्टाल में की कटौती

आदर्श शासकीय नवीन प्राथमिक शाला नवापारा, राजिम में प्रधानपाठक के पद पर पदस्थ गोपाल यादव ने इस वर्ष 23 अप्रैल को बेटा और बेटी दोनों की शादी का समारोह रखा था। उन्होंने बताया कि शादी में पान और आइसक्रीम का स्टाल लगाना था, लेकिन अंतत: इसे न लगाकर इस पर खर्च होने वाले करीब 21 हजार रुपये वनवासी कल्याण आश्रम को दान कर दिया। इस मौके पर आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी मौजूद थे। यादव आरएसएस के छत्तीसगढ़ प्रांत से सह प्रांत कार्यवाह की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैंं।

केस-02

विवाह प्रसंग में गूंजा परोपकार वचन

छत्तीसगढ़ कालेज में भूगोल के प्राध्यापक और दीनदयाल उपाध्याय नगर निवासी डा. टोपलाल वर्मा आरएसएस के सह प्रांत कार्यवाह हैं। सात जून 2022 को बेटे पंकज की शादी में सेवा भारती संस्थान को 50 हजार 201 रुपये दान किए। उन्होंने इसके लिए खान-पान की चीजों में कटौती की। विवाह प्रसंग के बीच ही अचानक उन्होंने माइक थामी और इसकी घोषणा की। इस दौरान उन्होंने बताया कि सेवा भारती संस्था वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को मुख्य धारा में लाने के लिए काम कर रही है। इस मौके पर संघ के प्रांत संघचालक डा. पूर्णेंदु सक्सेना भी मौजूद थे।

केस-03

शादी की सालगिरह से खर्च

देवेंद्र नगर के विनोद पटेल ने शादी की सालगिरह के दौरान कुछ रुपये दान दिए थे। सेवा भारती के संचालक पटेल बताते हैं कि लोगों की ओर से मिल रही मदद से सैकड़ों विद्यार्थियों के चरित्र और व्यक्तित्व निर्माण के लिए संस्कार पाठशाला लगा रहे हैं। कुछ लोग अपने जन्मदिन पर संतान को दुआएं मिलने के लिए दान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग अपनी क्षमता के अनुसार दान कर सकते हैं। इसमें किसी प्रकार का बंधन नहीं है। बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। छोटी सी मदद भी बहुत काम की होती है।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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