रायपुर। Hindu Cremation: हिन्दू धर्म के गरुड़ पुराण में उल्लेखित है कि अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद नहीं करना चाहिए। चूंकि हिन्दू धर्म में मृत्यु संस्कार की सारी रस्में गरुड़ पुराण के अनुरूप निभाई जाती है, इसलिए गृहस्थजन शव का अंतिम संस्कार शाम के बाद नहीं करते।

पुजारी पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार गरुड़ पुराण में कहा गया है कि यदि सूर्यास्त के बाद संस्कार किया जाए तो आत्मा को परलोक में कष्ट भोगने पड़ते हैं। इसी कारण सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार उचित नहीं माना गया ताकि मरने वाले को अगले जन्म में कोई कष्ट न भोगना पड़े।

गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि किसी की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है तो उसका अंतिम संस्कार रात को नहीं बल्कि दूसरे दिन सूर्यास्त से पहले किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद स्वर्ग का द्वार बंद हो जाता है और नर्क का द्वार खुल जाता है।

अगर मरने के बाद व्यक्ति का अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद किया जाता है तो उसे नरक में जाना पड़ता है। साधु, संतों का दाह संस्कार नहीं किया जाता बल्कि दफनाया जाता है। चाहे दाह संस्कार हो या दफन संस्कार, दोनों ही रात्रि में करना हिन्दू धर्म में वर्जित है।

Posted By: Azmat Ali

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