रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बचपन से ही हमारे अंदर यह भय पैदा कर दिया जाता है कि ऐसा मत करो नहीं तो यह हो जाएगा। इसका दुष्प्रभाव यह होता है कि बहुत प्रयास करने पर भी हम ताउम्र उस भय से बाहर नहीं निकल पाते। मन में छिपे इस डर को जीतना होगा। हमारे अंदर इतनी अधिक शक्ति छिपी हुई है कि उसके जागृत होने पर हम किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। हमारा आत्मविश्वास इतना बढ़ जाएगा कि कभी अपने को कमजोर नहीं समझेंगे। उक्त विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शांति सरोवर में गृह सचिव अरुण देव गौतम ने व्यक्त किए।

आध्यात्मिकता द्वारा जीवन मूल्यों की रक्षा विषय पर गौतम ने कहा कि अध्यात्म का सीधा सा अर्थ है स्व की खोज यानी निज स्वरूप की पहचान। राजयोग मेडिटेशन द्वारा स्वयं को परमात्मा की छत्रछाया में सुरक्षित समझने से भय और आशंकाओं से मुक्त हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें : बीएएसएलपी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू, इस वेबसाइट से आवेदन पत्र करें डाउनलोड

क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी कमला दीदी ने कहा कि दुनिया में जिस तेजी से विज्ञान और तकनीक का विकास हो रहा है, उसी तेजी से नैतिक मूल्यों का पतन भी हो रहा है। पहले इतने भौतिक सुख के साधन नहीं थे किंतु लोगों में परस्पर भाई-चारा, स्नेह और अपनापन था। इन दिनों मनुष्य तनाव, भय और असुरक्षा के साए में जीवन बीता रहा है। सहनशक्ति की कमी होने से झट तनाव में आ जाता है।

राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने कहा कि इस समय तनाव और अवसाद सबसे बड़ी समस्या है। तनाव बीमार कर रहा है। राजयोग मेडिटेशन हमें परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति देता है। हीन भावना से बचने के लिए कभी भी अपनी तुलना किसी दूसरे से नहीं करनी चाहिए।

Posted By: Ashish Kumar Gupta

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close