रायपुर। प्रदेश की जनता खुश है कि सरकार ने हुक्का बार पर प्रतिबंध लगाकर युवाओं को नशे की गर्त में जाने से बचाने के लिए अच्छा कदम उठाया है। अब महिलाओं को उम्मीद जागी है कि हुक्का बार की तरह शराबबंदी भी हो जाए तो परिवार में खुशियां छा सकती हैं। कई गांवों की महिलाओं ने शराबबंदी करने अभियान छेड़ा था, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। अब महिलाएं आश्वस्त है कि देर सबेर शराब पर भी प्रतिबंध लगेगा।

वर्तमान कांग्रेस सरकार ने भी चुनाव जीतने के लिए शराबबंदी को घोषणा पत्र में शामिल किया था। सरकार की अनेक घोषणाएं पूरी की जा चुकी है, बस शराबबंदी पर मुहर लगना बाकी है। हुक्का बार पर लगाम लगाकर सरकार ने अच्छे संकेत दिए है। लोगों का कहना है कि सरकार अपने कार्यकाल के आखिरी साल में भी शराबबंदी कर दे तो यह छत्तीसगढ़ के लोगों का जीवन स्तर सुधारने में सहायक हो सकता है।

बरात में नाच गाना पर प्रतिबंध, हजम नही

शादी का सीजन शुरू हुए 10 दिन बीत चुके हैं। बराती नाच गाकर खुशियां मना रहे हैं, अब प्रशासन ने गाइडलाइन जारी करके कई नियम थोप दिए हैं, इससे दूल्हा-दुल्हन के स्वजन चिंतित हो गए हैं। कोरोना महामारी की दहशत में जी रहे लोगों ने पौने दो साल तक सादगी से जीवन गुजारा। अब फिर धूमधाम से शादी करने के सपने देख रहे थे, महामारी पैर न पसारे इसलिए प्रशासन अलर्ट हो गया और नियम जारी कर दिए।

इससे लोग दुखी हो गए हैं, उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा समय रहते नियम क्यों नहीं बनाए जाते। अब, जबकि नए मुहूर्त सीजन की आधी शादियां निपट गई हैं तब गाइडलाइन जारी करने का क्या मतलब? होटल, धर्मशाला, घोड़ी, बैंड बाजा सबकी बुकिंग है, ऐसे में बरात निकालने पर प्रतिबंध लगाने का औचित्य नहीं है। क्या दूल्हा, वैवाहिक भवन के भीतर घोड़ी पर चढ़े। यह नियम रास नहीं आ रहा है।

राजधानी की शान बचाना सबकी जिम्मेदारी

राष्ट्रीय स्वच्छता रैंकिंग में 21वें स्थान से छठे स्थान पर राजधानी रायपुर के आने से सभी लोगों को खुशी हो रही है। हो भी क्यों न, आखिर इससे शहर की शान बढ़ी है। महापौर का मान भी बढ़ा है। सफाई में जितना योगदान प्रशासन का है, उतना ही सफाई अभियान को प्रोत्साहित करने वाले सामाजिक संगठनों का भी है, आम जनता का जागरूक होना भी मायने रखता है।

बुद्धिजीवी कह रहे हैं कि कोरोना महामारी ने हर परिवार को सिखाया है कि स्वच्छता रखना कितना जरूरी है। निगम की कचरा गाड़ी किसी गली में पहुंचते ही सारे घर केदरवाजे खुल जाते हैं, कचरा गाड़ी में डालने के बाद घर बंद होते हैं, पहले ऐसी जागरूकता नहीं थी, घर के बाहर नालियां जाम रहती थी। यदि थोड़ी सी और समझदारी आ जाए तो स्वच्छता रैंकिंग में छलांग लगाई जा सकती है। अब, स्वच्छता की शान को बरकरार रखना सबकी जिम्मेदारी है।

महंगाई और सद्बुद्धि यज्ञ

समस्याओं को लेकर प्रदर्शन, रैली का आयोजन करके वाहवाही लूटने में शहर के युवा विधायक मशहूर हैं। ऐसा ही एक अनोखा आयोजन बढ़ती महंगाई के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ किया गया। बकायदा पूजन यज्ञ करके आहुति दी और देश के बड़े नेताओं की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना की। इस प्रदर्शन रूपी यज्ञ से जताया कि जो नेता महंगाई का विरोध करके सत्तानशीन हो गए, वे अब अपना फर्ज भूल गए और जनता को बदहाल जीवन जीने मजबूर कर दिया है।

दूसरी ओर आम जनता का कहना है कि अब वह दिन दूर नहीं जब टमाटर, आलू, प्याज भी प्रति नग की कीमत में बिकेगा। पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमत से जनता वैसे ही परेशान है, सब्जी, दाल, चावल खरीदने के लाले पड़े हैं। केंद्र और राज्य सरकार दोनों को परवाह नहीं है। कभी भाजपा के नेता तो कभी कांग्रेसी नेता प्रदर्शन कर रहे हंै। जनता तमाशा देखती है।

Posted By: Kunal Mishra

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