रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मार्च के आखिरी सप्ताह में आग उगल रहे सूरज ने महीने के अंतिम दिन तो 30 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। झुलसा देने वाली गर्मी के चलते सुबह ही दोपहर होने का अहसास हुआ। दोपहर में लगा जैसे हवा लू के थपेड़ों में तब्दील हो गई है। नतीजा, बाजार सूने और जिन चौराहों पर आम दिनों में ट्रैफिक से जाम के हालात रहते हैं, वहां कर्फ्यू जैसी स्थिति थी। शुक्रवार को पारा 42.4 डिग्री सेंटीग्रेड पर जा पहुंचा। इससे पहले साल 1987 में इतना तापमान दर्ज हुआ था।

मौसम विज्ञानी गोपाल राव के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ का ज्यादा नहीं बन पाना बढ़ते तापमान की मुख्य वजह है। विक्षोभ ज्यादा बनने से उत्तर-पश्चिमी राज्यों में बारिश होती है। इससे तापमान में नमी आती है। इस बार उन राज्यों से गर्म हवाएं आ रही हैं। विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि उत्तर में शुक्रवार को तापमान कम दर्ज किया गया है। ऐसे में शनिवार को तापमान में गिरावट आ सकती है।

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