श्रीशंकर शुक्ला। रायपुर। नईदुनिया

प्रदेश में अब वन्यजीवों की तस्करी और शिकार करने वालों की खैर नहीं होगी। वन विभाग के अधिकारियों को अब अपराधियों के मोबाइल डिटेल और लाइव टावर लोकेशन के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। वन विभाग के अधिकारी भी अब मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की तर्ज पर अपराधियों के लाइव टावर लोकेशन और कॉल डिटेल की जानकारी आसानी से ले सकेंगे। इससे वन विभाग जहां आरोपियों के ऊपर आसानी से शिकंजा कस सकेगी तो वहीं प्रदेश में बढ़ते अपराधों पर भी लगाम लगेगी। इसके लिए वन विभाग प्रदेश के प्रतिभाशाली अधिकारियों को नियुक्त करेगा। वन विभाग के अधिकारी का कहना है कि मोबाइल डाटा और लाइव टावर लाकेशन के लिए राज्य सरकार को प्रपोजल बनाकर भेज रही है। अनुमित मिलने पर इसे शुरू किया जाएगा।

ज्ञात हो कि वन विभाग में पिछले एक साल में तकरीबन 35 वन्यजीवों का शिकार हुआ है, जिसमें तेंदुआ, पेंगोलिन, चीतल, सांभर, भालू, हाथी आदि वन्यजीवों का शिकार और तस्करी की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं। हाल ही में अचानकमार टाइगर रिजर्व क्षेत्र में तेंदुआ का शिकार हुआ था। इस मामले में दो एसडीओ को विभाग ने निलंबित किया है। इसी तरह बस्तर में दो पेंगोलिन का शिकार हुआ था। उदंती सीतानदी में पेंगोलिन की तीन खाल बरामद की गई थी। ठीक इसी तरह सितंबर 2019 में मैनपुर के जंगल में एक ग्रामीण से 50 हजार रुपये में तेंदुए के दोनों बच्चों को खरीदकर उसे बेचने कार से रायपुर ला रहे थे। वाहन चेकिंग में फंसने के डर से उन्होंने बीच रास्ते में कार छोड़कर एक्टिवा क्रमांक सीजी 04 एमएम 1645 के सामने तेंदुए के बच्चों को झोले और पिंजरे में रखकर ला रहे थे। सूचना पर पुलिस ने पकड़कर जांच की तो एक्टिवा के सामने रखे दो झोले और पिंजरे में बंद तेंदुए के दो बच्चे मिले। पुलिस ने मौके पर ही तस्कर मोहम्मद साबिर और राकेश निषाद को गिरफ्तार किया था, लेकिन मुख्य आरोपित अभी तक फरार है।

जांच के दौरान ऐसे आती है दिक्कत

वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि शिकार या फिर तस्करी के मामले सामने आने पर वन विभाग के पास यह पावर नहीं है कि वह आरोपित के मोबाइल का लोकेशन और लाइव टावर लोकेशन की जानकारी ले सके। इसके लिए वन विभाग को पुलिस की भी मदद लेनी पड़ती है, जिससे अधिकारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लेकिन मोबाइल का लोकेशन और लाइव टावर लोकेशन की अनुमति मिलने के बाद अपराधों को सुलझाने में काफी मददगार साबित होगा।

तेज तर्रार अधिकारियों को जिम्मेदारी

एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के अनुसार वन विभाग के 18 तेज तर्रार अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। साथ ही जिन वनक्षेत्रों में ज्यादा सिकार और तस्करी की घटनाएं होती हैं, वहां मुखबिर तंत्र खड़े किए जाएंगे। वन्यजीवों के शिकार और तस्करी की घटनाओं को रोकने के लिए फॉरेस्ट गार्ड को ट्रेंड किया जाएगा। इसके साथ ही वनक्षेत्र से सटे गांवों में रहने वाले स्थानीय लोगों को शिकार की घटनाएं और वन्यजीवों की तस्करी को रोकने क्या उपाय करनी चाहिए इस संबंध में जानकारी दी जाएगी।

वर्जन

लाइव टावर लोकेशन और कॉल डिटेल रिकार्ड के लिए राज्य सरकार को प्रपोजल बनाकर दिया गया है। स्वीकृति मिलने पर काम शुरू किया जाएगा।

- अरुण कुमार पाण्डेय, एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ , छत्तीसगढ़

Posted By: Nai Dunia News Network

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