रायपुर। Raipur Local Edit: पुलिस की छवि आमजन में नायक और खलनायक दोनों की है। जब वे लोगों के बीच सकारात्मक भूमिका निभाते हैं तो नायक रूप में सराहे जाते हैं, लेकिन उनके ही कुछ साथी संवेदन शून्य होकर क्रूर रूप दिखाते हैं तो उन्हें खलनायक रूप में देखा जाने लगता है। चंद पुलिस कर्मियों की करतूत पूरे महकमे को बदनाम कर देती है। ऐसे में लोगों के बीच पुलिस की छवि विश्वास पैदा करने के बजाय अनावश्यक खौफ पैदा करती है। इसके कारण लोग पुलिस को सहयोगी और रक्षक नहीं, बल्कि संदेह की दृष्टि से देखते हैं।

पुलिस का भय अपराधियों की जगह आम लोगों में दिखे तो यह छवि निश्चित रूप से चिंताजनक है। हालांकि, यह भी सत्य है कि पुलिस और उनके अधिकारियों पर अनावश्यक राजनीतिक दवाब और तबादले की तलवार लटकती रहती है। यह स्थिति कानून के हाथ बांध देता है और उनको खुलकर अपनी वास्तविक भूमिका निभाने से रोकती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल यह चिंता जायज है कि पुलिस की छवि में सुधार हो और लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास का भाव पैदा हो।

उन्होंने आइजी-एसपी की बैठक में कुछ मंत्र भी दिए हैंं और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाया है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि राज्य में अपराध को नियंत्रित करना होगा और नशे का कारोबार तो बिलकुल मंजूर नहीं होगा। गांजा की एक पत्ती भी नहीं आनी चाहिए। नशे के नेटवर्क को उखाड़ फेंका जाए। पिछले कुछ समय से प्रदेश में आपराधिक मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।

पुलिस के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों, कानून के शासन के साथ नागरिकों के सम्मान तथा अधिकारों की रक्षा करते हुए अपने कार्य का निष्पादन और सामंजस्य बैठना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। वर्तमान में पुलिस-जनसंपर्क एक असंतोषजनक स्थिति में है। लोगों में पुलिस की छवि भ्रष्ट, पक्षपातपूर्ण, अक्षम और अनुत्तरदायी की है। सामान्यत: लोग पुलिस स्टेशन जाने से बचते हैं।

इसकी वजह औपनिवेशिक विरासत में पुलिस को मिली उसकी दमनात्मक पहचान है। पुलिस सुधार एक बहुप्रतीक्षित मांग और आवश्यकता है, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है। पुलिस सुधारों का उद्देश्य संगठनों के मूल्यों, कार्य संस्कृति, नीतियों और प्रथाओं में बदलाव से है। पुलिस अनुसंधान, स्मार्ट पुलिसिंग, लाजिस्टिक, आधुनिक लैब, हथियार, वाहन आदि की भी पुलिस को जरूरत है। साथ ही नागरिकों की तरफ से पुलिस को सहयोग और सम्मान की आवश्यकता है।

सरकार को यह भी देखना होगा कि पुलिस और अधिकारियों पर अनावश्यक राजनीतिक दबाव न हों। उनके तबादले केवल इस आधार पर न हो कि किसी राजनेता को वह पसंद नहीं है। आइपीएस अधिकारियों का तबदला कार्यकाल पूरा होने से पहले नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी कार्रवाई पुलिस का मनोबल गिराती है। आशा की जानी चाहिए कि सरकार पुलिस की छवि सुधारने में इन बातों का भी ध्यान रखेगी।

Posted By: Shashank.bajpai

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