रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरों में लुप्त हो रहे पौनी-पसारी व्यवसाय को बचाने की पहल शुरू की है। इसके लिए राज्य के सभी नगरीय निकायों में सर्वसुविधायुक्त बाजार बनाए जाएंगे। इन बजारों में पौनी-पसारी का परंरागत काम करने वालों को स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके एवज में उनसे 10 स्र्पये प्रतिदिन के हिसाब से किराया लिया जाएगा। बाजार के निर्माण को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग ने दिशा- निर्देश जारी किया है। इसमें बाजार के लिए स्थल चयन करते समय अफसरों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अफसरों को आगाह किया गया है कि अगर बाजार स्थल चयन की वजह फेल हुआ तो उसकी पूरी लागत जिम्मेदार अफसर से वसूली जाएगी।


शतप्रतिशत अनुदान देगी सरकार

पौनी-पसारी बाजार बनाने के लिए सरकार नगरीय निकायों को शतप्रतिशत अनुदान देगी। एक बाजार के निर्माण पर करीब 30 लाख स्र्पये खर्च का अनुमान है। योजना स्वीकृति के साथ ही सरकार 50 फीसद राशि जारी कर देगी। इस पहली किश्त की 70 फीसद राशि के उपयोग का प्रमाण पत्र प्राप्त होने के बाद दूसरी किश्त दी जाएगी।


निगम में चार और पालिका में दो बाजार

राज्य के नगर पंचायत में एक, नगर पालिका में दो, नगर निगम (रायपुर को छोड़कर) चार पौनी-पसारी बाजार बनाए जाएंगे। रायपुर नगर निगम ऐसे आठ बाजार बनाने का प्रस्ताव है।


क्या है पौनी-पसारी बाजार

नगरीय प्रशासन विभाग के उपसचिव आर. एक्का के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश में कहा गया है कि पौनी-पसारी छत्तीसगढ़ की संस्कृति का अभिन्न् अंग है, लेकिन शहरी और मशीनीकरण के कारण अब यह लुप्त हो रहा है। इसी वजह से परंरागत लोहार, नाई, मोची, धोबी, दर्जी, मूर्तिकार व बढ़ई समेत अन्य को पौनी-पसारी बाजार में स्थान दिया जाएगा।