रायपुर, नईदुनिया न्यूज। बस्तर से हटाए गए आईजी एसआरपी कल्लूरी का बुधवार को भाजपा के पक्ष में प्रचार करने का वीडियो वायरल हुआ और वे फिर विवादों में घिरते गजर आ रहे हैं। कल्लूरी के वॉट्सएप नंबर से जारी वीडियो वायरल हो गया। इसे उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

उधर कल्लूरी ने इसे सामान्य घटना बताते हुए कहा- मैंने गलत नहीं किया। जो वीडियो कहीं से आया था उसे फारवर्ड किया। मेरी मंशा किसी के पक्ष या विपक्ष की नहीं थी। इधर जानकारों का कहना है कि यह सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है। कोई भी शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल का पक्ष नहीं ले सकता।

कल्लूरी को एक महीने पहले जबरिया छुट्टी पर जाने कहा गया था, लेकिन वे लौट आए और पीएचक्यू में जॉइनिंग दे दी। अभी उन्हें कोई काम नहीं दिया गया है। भाजपा के पक्ष में जारी वीडियो में उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत तय बताई गई है।

मोदी शिवलिंग को अपनी भुजाओं में उठाकर भागीरथी की ओर चलते हैं और आम आदमी पार्टी, सपा-कांग्रेस, बसपा के नेता कोने में भयभीत खड़े देखते रहते हैं। बैक ग्राउंड से शिव स्त्रोत के साथ गाना चलता है-कौन है वो कौन है, कहां से वो आया। चारों दिशाओं में बेल सा वो छाया। उसकी भुजाएं, बदलें कथाएं। भागीरथी तेरी तरफ शिवजी चले देख जरा ये विचित्र माया। यह वीडियो बस्तर के कई वॉट्सएप ग्रुप्स में चल रहा है।

प्रचार नहीं किया, संभावना जताई

रिटायर्ड आईएएस बीकेएस रे के मुताबिक सिविल सेवाओं में यह स्पष्ट नियम है कि कोई शासकीय सेवक किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग नहीं लेगा। अगर सोशल मीडिया में प्रचार किया तो आपत्तिजनक है। लेकिन यह भी है कि उन्होंने दल का प्रचार नहीं किया, विजय की संभावना जताई। ऐसा निजी जीवन में सभी करते हैं। यह देखना चाहिए कि गलत मैसेज न जाए।

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