रायपुर। छत्तीसगढ़ में 2007 का आईएलएफएस कांड का जिन्न् फाइलों से निकलने के लिए बेताब है। अगर यह फाइल खुली तो पूर्व मुख्य सचिव पी. जाय उम्मेन समेत कई जांच के घेरे में आ सकते हैं। करीब 12 वर्ष पहले कांग्रेस नेता राजेश बिस्सा ने इसे उजागर किया था।

मामला कोर्ट से लेकर लोकायुक्त तक पहुंचा था। बिस्सा कहते हैं कि इसकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर वे तत्कालीन सरकार को पूरे साक्ष्य के साथ कई बार पत्र लिखे थे। सरकार चाहे तो इसकी फिर से जांच करा सकती है।


यह है आईएलएफएस कांड

मामला 2007 का है, तब पी. जाय उम्मेन पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रमुख सचिव थे। उन्होंने 25 सौ किमी सड़क बनाने के लिए आईएलएफएस कंपनी से 9600 करोड़ में एग्रीमेंट किया। बाद में निगोशियेशन में उसे बढ़ाकर 14 हजार करोड़ कर दिया गया। इसके लिए प्रशासकीय स्वीकृति भी नहीं ली गई।

इसको लेकर 2007 में जमकर बवाल मचा था। इसके बाद तत्कालीन भाजपा सरकार को आईएलएफएस के एग्रीमेंट को रद करना पड़ा, लेकिन तब तक इसके डीपीआर से लेकर तमाम कामों पर विभाग ने करीब 10 करोड़ स्र्पये खर्च कर डाला था।

दो दिन ठप रही थी विधानसभा की कार्रवाई

मामले का खुलासा होने के बाद कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया। विधानसभा सत्र के दौरान इसको लेकर कांग्रेस विधायकों ने इतना हंगामा किया कि दो दिनों तक सदन की कार्रवाई ठप रही। इसी वजह से सरकार ने एग्रीमेंट रद कर मामले को ठंडा करने का प्रयास किया।

इस वजह से चर्चा में है मामला

यह मामला पूर्व मुख्य सचिव उम्मेन के एक पत्र की वजह से फिर चर्चा में आया है। सरकार ने नवा रायपुर के पूर्व सीईओ अशोक बजाज को नवा रायपुर के पहले शिलान्यास वाली जमीन को आईआईएम को अावंटित करने के मामले में निलंबित कर दिया है।

इस पर उम्मेन ने बजाज का बचाव करते हुए एक पत्र लिखा है। इसमें उम्मेन ने जमीन आवंटन की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए यह भी लिखा है कि वह शिलान्यास का पत्थर इस वजह से सुरक्षित है क्योंकि वह आईआईएम की बाउंड्री में है। इसके लिए कांग्रेस को पूर्ववर्ती सरकार का आभारी होना चाहिए।

पुख्ता प्रमाण है, जांच होनी चाहिए

इस मामले में कांग्रेस नेता बिस्सा का कहना है कि हमारे पास दस्तावेजी प्रमाण हैं। इसकी फिर से जांच होनी चाहिए, क्योंकि पिछली सरकार ने इस पर लीपापोती कर दी थी।