रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जैन दादाबाड़ी में नवपद ओली की आराधना के पांचवें दिन मुनि मनीष सागर ने श्रीपाल व मैना सुंदरी के कथानक से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। मुनि ने कहा कि पंच परमेष्ठी का आलंबन लेकर हम अपने जीवन को निर्मल बनाएं। श्रीपाल व मैना सुंदरी के कथानक से हमें यही सीख मिलती है कि जीवन में परिस्थितियों का सामना करते हुए हमें अध्यात्म ज्ञान का उपयोग करते हुए अपने कर्मों की निर्जरा किस तरह करनी चाहिए। परिस्थितियां सबकी बदलती रहती हैं, लेकिन परिस्थितियों के बदलाव से अप्रभावित, शांत, सहज रहकर कर्मों की निर्जरा करते हुए धर्म कार्य में स्वयं को रत रखना ही बुद्धिमान की पहचान है।

परिस्थितियों से न घबराएं

परिस्थितियां केवल कर्मों का लेखा-जोखा है, जो एक दिन बीत जाने वाला है। परिस्थितियों के वश में होकर हर्षित और शोकाकुल होना यह संसारी व्यक्ति की वृत्ति होती है, वह अनुकूलता से प्रतिकूलता में जाते हुए बहुत अधिक शोकाकुल हो जाता है और जितनी प्रतिकूलता से अनुकूलता में आता है उतना ही अधिक हर्षित हो जाता है। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी शांति से अपने जीवन को वही आगे बढ़ा पाता है जो धर्म के मर्म को जानता है। जिसके पास परमात्मा और गुरुओं से प्राप्त तत्व ज्ञान होता है वह अनुकूल-प्रतिकूल परिस्थितियों में कभी विचलित नहीं होता।

कल्याण मित्र को न भूलें

एक प्रसंग से सीख देते हुए कहा कि कल्याण मित्र के उपकार को कभी भूलना नहीं चाहिए और उसकी बात को कभी नकारना नहीं चाहिए। जो धर्म से आपको जोड़े वही आपका कल्याण मित्र है। धर्म से जब जो जोड़े, कभी पीछे नहीं हटना, अधिक से अधिक धर्म से जुड़कर साधना-आराधना करना यह हमारा कर्तव्य है।

Posted By: Nai Dunia News Network