रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जीवन के अंतिम समय में जीभ काम नहीं आएगी, आपके कान काम आएंगे। रसना को आपने पूरा जीवन दिया है, अंतिम समय में कानों को खुला रखना। जीवन के अंतिम समय में भी जिनवाणी मां का पान करने के लिए रसना नहीं, कान ही काम आएंगे। अपने कानों की कीमत को पहचानो। यह संदेश फाफाडीह दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य विशुद्ध सागर ने दिया।

आचार्य ने कहा कि ऐसी वाणी मत सुनना, जिससे कान फट जाएं। आज डीजे में लोग नृत्य करते हैं, कान भी फटता है और हार्टअटैक से मौत भी होती है। 24 घंटे मोबाइल पर लगे रहते हैं, इतना तीव्र सुनकर कर्ण इंद्रिय को खराब कर रहे हैं। आज से दिन में एक घंटे मोबाइल न चलाने का नियम लो। बाहर की बातें मत सुनना फिर देखना इससे कितनी शांति मिलेगी।

मुनि संजयंत सागर ने कहा कि सुख की उपलब्धि पुण्य से होगी और पुण्य विशुद्धि से आएगा। कल्याण तो तभी होगा जब हमारी आत्मा राग, द्वेष, मोह का त्याग करें, इनका अभाव हो जाए तो हम विशुद्धि को प्राप्त करेंगे। राग, द्वेष ,मोह से रहित होना ही परम विशुद्धि है।

जगत में जितने लोग हैं सुख चाहते हैं, पुण्य का फल चाहते हैं, लेकिन कोई पुण्य नहीं करना चाहता। सब पाप का फल नहीं चाहते, लेकिन दिन-रात पाप कर्मों में लगे रहते हैं। स्वयं को विशुद्धि का स्थान बनाएंगे, तभी हमारी आत्मा परम सुख को प्राप्त कर सकेगी।

Posted By: Pramod Sahu

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close