रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

डिजिटल क्रांति के इस युग में आने वाला दौर वाकई बड़ी प्रतिस्पिर्धा का होने जा रहा है। इस युग में एक-दूसरे से आगे रहने के लिए कंपनियों को ऑटोमेशन का सहारा लेना ही पड़ेगा। ऐसे में विश्व स्तर से लेकर भारत में 2030 तक ऑटोमेशन का उपयोग तेज गति से होगा। इसके कारण कई सेक्टरों में नौकरियां कम हो जाएंगी। वहीं शिक्षाविदों समेत आईआईटी रायपुर के डायरेक्ट डॉ. रजत मूणा की मानें तो ऑटोमेशन के कारण डिजिटल क्रांति के दौर में नौकरी का संकट नहीं, बल्कि जॉब क्वालिटी में तेजी सुधार देखा जाएगा।

स्किल्ड डेवलमेंट पर करना होगा फोकस

कंप्यूटर, इंजीनियरिंग, आर्किट्रेक्चर और मैथमेटिकल इंडस्ट्री में जाना ज्यादा पसंद करते हैं। इन सेक्टर्स में रोबोट की ज्यादा भूमिका नहीं रहेगी, क्योंकि यहां स्व विवेक का इस्तेमाल होता है, जबकि रोबोट वही काम कर पाता है, जिसका फंक्शन उसमें फीड होता है। इंटरनेट थिंक से दो डिवाइस आपस में रोज मर्रा के कार्य करेंगे। इससे जॉब की तुलना में कई नए तरह के जॉब के मौके पैदा होंगे। हालांकि युवाओं को इस संकट से घबराने के बजाय स्किल्ड डेवलमेंट पर फोकस करना होगा। इससे रोबोर्ट की उपयोगिता के साथ कई सेक्टरों में नौकरी सुरक्षित रहेगी।

रोबोट के भरोसे होंगे कार्य

आने वाले वक्त में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रोबोटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी के नाम से जिस चौथी औद्योगिक क्रांति की संभावना जताई जा रही है, उस क्रांति के दौर में मशीनों के आगे लोगों की नौकरियां कुर्बान होंगी। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट की मानें तो अगले पांच साल में विश्व में 50 लाख से ज्यादा रोजगार रोबोट के हाथ में होगा।

ऑनलाइन कोर्स से रहे अपडेट

काम करने के लिए ऑटोमेशन की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऑटोमेशन के कारण कई सेक्टरों में नौकरियां कम हो जाएंगी और कई नौकरियां तो पूरी तरह से मार्केट से गायब ही हो जाएंगी। लेकिन बशर्ते युवाओं को इन मौकों के लिए खुद को तैयार रखने की जरूरत है। मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में ज्यादातर कोर्स ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ही मौजूद हैं।

80 करोड़ नौकरियां में संकट

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (विश्व आर्थिक मंच) की रिपोर्ट के अनुसार भविष्य में नौकरियों की राह आसान नहीं रहने वाली है। एनआइटी दिल्ली में प्रोफेसर रहे वी. उपाध्याय ने बताया कि रिपोर्ट में काफी फीसदी सच्चाई है, लेकिन स्वयं को अपडेट करने से इस संकट को कम किया जा सकता है। वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर 80 करोड़ नौकरियां संकट में होंगी। ये नौकरियां छीनने वाला कोई और नहीं, बल्कि रोबोट होगा।

इंडस्ट्रीज में भारी छंटनी होगी

रिपोर्ट को देखें तो रोबोट से भारत को नुकसान होगा। उसकी वजह लोगों में स्किल्ड डेवलअपमेंट का कम होना है। इसी तरह से इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी भारी छंटनी होगी, जिसमें मशीन ऑपरेटिंग से लेकर ऑफिस ऑपरेटिंग के साथ सभी तरह की इंडस्ट्रीज शामिल हैं, जहां भयंकर लोगों की नौकरी छंटनी होगी, क्योंकि यहां के सारे कार्य रोबोट पर निर्भर होगा। इस तरह से इंडस्ट्रीज में लोगों को अपडेट रहने की जरूरत होगी।

वर्सन

अधिक सोचने की है उपज

डिजिटल क्रांति में नौकरी में संकट की वजह स्वयं मनुष्य है। कभी मोबाइल, अब वॉट्सएप इसके बाद रोबोट की जरूरत से नौकरियां कम हो रही हैं। किताबी पढ़ाई में कोई क्वालिटी नहीं, सिर्फ डिग्रियां लेने की चाहत है। प्रैक्टिकल पढ़ाई से ही युवाओं को रोजगार सुरक्षित है।

-चंदमोहन सिंह, सहायक प्रोफेसर, दिशा कॉलेज

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आईटी की पढ़ाई करना फायदेमंद

आइटी प्रोफेशनल्स की डिमांड सर्वाधिक रहेगी। टेक्नोलॉजी के इस जमाने में साइबर सिक्योरिटी बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रही है। ऐसे में साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स को नौकरियां मिलने में आसानी होगी।

-प्रो.मानवेंद्र त्रिपाठी, पीआरओ, एनआईटी

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जॉब क्वालिटी में सुधार

नौकरी जाने की बात सुनकर डरने की जरूरत नहीं है। एक तरफ ऑटोमेशन के चलते लोगों के हाथ से नौकरियां छिनेंगी तो दूसरी तरफ से नौकरियों आएंगी भी। डिजिटल क्रांति के दौर में नौकरी का संकट नहीं, बल्कि जॉब क्वालिटी में सुधार होगा।

-डॉ. रजत मूणा, आईआईटी डायरेक्टर, रायपुर

इन फील्ड में रोबोट का असर रहेगा बेअसर

-डेटा एनालिस्ट की डिमांड भी बढ़ती रहेगी। लिहाजा डेटा एनालिस्ट या स्टैटिशियन्स के लिए 2020 तक बंपर रोजगार पैदा होंगे।

-कॉमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल डिजाइनर्स के लिए 2020 तक क्रिएटिव लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

-रेगुलेटरी एंड गवर्नमेंट रिलेशंस एक्सपर्ट्स की मांग रहेगी, जो कानूनी अड़चनों को डील करने के लिए मैनपावर की डिमांड रहेंगी।

-सेल्स प्रोफेशनल्स को भी नौकरियों के लिए संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर एक डिजिटल मीडिया कंपनी उन्हीं लोगों को नौकरी पर रखेगी, जो डिजिटल मार्केटिंग, मोबाइल एडवरटाइजिंग के जानकार होंगे।

-लीडर, एक्सपर्ट्स, कंसल्टेंट के उद्योगों में उथल-पुथल के दौर में कंपनियों को ऐसे लोगों की भी जरूरत पड़ेगी, जो कि आगे आकर कंपनियों को संकट से उबार सकें। मीडिया, मनोरंजन और सूचना ऐसे क्षेत्र हैं, जहां इस तरह के लोगों की जरूरत पड़ेगी।

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सं. आरकेडी

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