रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Independent 2021 Story: पुरानी बस्ती का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जैतूसाव मठ आजादी से पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए बैठकें करने का अहम केंद्र हुआ करता था। यहीं पर देश-भक्ति की अलख जगाने के लिए योजना बनाई जाती थी। मठ के महंत स्व. लक्ष्मीनारायण दास के नेतृत्व में अनेक सेनानी अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाने जुटते थे। इसी मठ में महात्मा गांधी ने एक दलित बच्ची के हाथों कुएं से पानी निकलवाकर पीया था और छुआछूत के भेद को खत्म करने का संदेश संपूर्ण छत्तीसगढ़ में दिया था।

इतिहासकार डा.रमेन्द्र नाथ मिश्र बताते हैं कि 1933 में जब महात्मा गांधी छत्तीसगढ़ के दौरे पर आए थे, तब वे सेनानियों के अनुरोध पर जैतूसाव मठ पहुंचे थे। उस वक्त छुआछूत का बोलबाला था, दलित समुदाय के लोग दूर बैठते थे, ऐसे में गांधीजी ने एक दलित बच्ची को बुलवाया और उसके हाथों कुएं से पानी निकालकर पिया। साथ ही स्थानीय लोगों को भी वही पानी पिलवाकर छूआछूत समाप्त करने का संदेश दिया। इसके बाद मठ में दलितों को प्रवेश मिलने लगा और उन्हें कुएं का पानी भी नसीब होने लगा।

जैतूसाव मठ में स्थानीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महंत लक्ष्मीनारायण दास, पं.सुंदरलाल शर्मा, पं.रविशंकर शुक्ल, ठाकुर प्यारेलाल आदि के अनुरोध पर राष्ट्रीय स्तर के नेता डा.राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, शौकत अली, सरदार वल्लभभाई पंत भी आए थे। उनके आह्वान पर देश को आजादी दिलाने के लिए संघर्ष और आंदोलनों में भाग लेने पर चर्चा होती थी। उन सेनानियों के मार्गदर्शन में इलाके के आचार्य सरयूकांत झा, श्रीमती बेनबती मिश्र, बागेश्वर दाऊ, यदुवंश नाथ ठाकुर, मावली प्रसाद श्रीवास्तव, श्रीमती सिंगारा ठाकुर, पं.हीरालाल शास्त्री, पं.रतनलाल झा, ध्रुवनारायण ठाकुर, पं.त्रयंबकनाथ ठाकुर ने गांधीजी के आदर्शों पर चलकर उनके विचारों को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।

महिलाओं ने जलाई थी साड़ियों की होली

महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन से प्रेरणा लेकर महिलाओं ने जैतूसाव मठ के समीप टुरी हटरी इलाके में साड़ियों की होली जलाकर विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया था।

नया भवन को दिया गांधी भवन का नाम

जैतूसाव मठ में जहां महात्मा गांधी ठहरे थे, उस जगह को नया भवन कहा जाता है, अब वहां गांधीजी की प्रतिमा लगाई गई है, साथ ही उसे गांधी भवन नाम दिया गया है।

Posted By: Kadir Khan

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