रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में ओबीसी आरक्षण को रोस्टर में आठवें स्थान पर रखने पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भगवान लाल साहनी ने नाराजगी व्यक्त की है। साहनी ने गुरुवार को रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में मीडिया से चर्चा में कहा कि छत्तीसगढ़ में 14 फीसद आरक्षण ओबीसी को दिया जा रहा है, लेकिन रोस्टर में उन्हें आठवें नंबर पर रखा गया है। यह पिछड़ा वर्ग के साथ अन्याय है।

साहनी ने कहा कि केंद्र सरकार ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया है, उसके बाद भी पिछड़ा वर्ग की स्थिति चौथे नंबर पर है। ओबीसी को आरक्षण का लाभ रोस्टर में भी देना चाहिए। छत्तीसगढ़ में 14 फीसद आरक्षण में उनकी स्थिति दूसरे नंबर पर आनी चाहिए। इस मामले में जब पदाधिकारियों और मुख्य सचिव से बात होगी तो इस बात को भी रखा जाएगा।

साहनी ने कहा कि ओबीसी वर्ग की समस्याओं का अध्ययन करने के लिए आए हैं। अध्ययन के आधार पर आयोग निर्णय लेगा। मुख्य समस्या तो यह है कि जब राज्य सरकार के अधिकारियों से जवाब मांगा गया कि ओबीसी की स्थिति क्या है, तो कोई जवाब नहीं आया, सब मौन हैं। इसके बाद साहनी ने राज्य में पिछड़ वर्ग के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और आरक्षण नियमों के पालन के संबंध में अधिकारियों की बैठक ली।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रदेश में आरक्षण रोस्टर देखने के लिए एक लाइजनिंग अधिकारी हर विभाग में रहे, जो यह देखे कि आरक्षण नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। विभाग के सचिव डीडी सिंह ने छत्तीसगढ़ राज्य की भौगोलिक एवं जनसंख्या संबंधी सामान्य जानकारी प्रस्तुत करते हुए पिछड़े वर्ग को विभिन्न् योजनाओं में लाभान्वित किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

उन्होंने शासकीय सेवाओं में पिछड़ा वर्ग के लिए राज्य में 14 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था के तहत भरे और बैकलाग पदों की जानकारी दी। यह भी बताया कि राज्य में जिला एवं संभाग स्तर पर जनसंख्या के अनुपात में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर अलग-अलग पदवार रोस्टर प्रणाली लागू है।

पंचायत और नगरीय निकाय में आरक्षण की सराहना

साहनी ने त्रिस्तरीय पंचायती राज्य संस्थाओं और नगरीय निकायों में पिछड़ा वर्ग को प्रतिनिधित्व दिलाने दिए जा रहे आरक्षण की सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग के लोगों के भलाई और उनके हितों की रक्षा के लिए बेहतर कार्य किया जा रहा है। सरकार के कार्यों से राज्य में पिछड़े वर्ग के लोगों को महत्व मिला है। राज्य में ओबीसी आरक्षण के अतिरिक्त मेरिट के आधार पर सामान्य सीट पर चयनित होने पर कहा कि यह अन्य राज्यों के लिए उदाहरण है।

विश्वविद्यालय में आरक्षण की ली जानकारी

राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष ने पूछा कि राज्य के विश्वविद्यालयों में आरक्षण का पालन किया जा रहा है या नहीं। अधिकारियों ने बताया कि शासकीय अनुदान प्राप्त संस्थाओं में भी आरक्षण का काम किया जाता है।

Posted By: Shashank.bajpai

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