रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

गर्मी शुरू होते ही ट्रेन टिकट की डिमांड भी बढ़ जाती है। टिकट की मांग बढ़ते ही दलालों की चांदी हो जाती है। राजधानी में टिकट दलालों का गोरखधंधा खूब फल-फूल रहा है। पिछले सप्ताह रायपुर रेलवे मंडल के अंतर्गत एक ही दिन में सात अलग-अलग जगहों में कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। राजधानी में चार टिकट दलालों को रंगे हाथ टिकट ब्लैक करते हुए पकड़ा गया था। रेलवे की चेतावनी के बाद भी दलाल टिकट बुक कर रहे थे। रेलवे आइडी पर बैन होने के बाद फर्जी आइडी बनाकर महंगे दामों पर तत्काल टिकट निकालने का खेल खेल रहे हैं। आरपीएफ की कार्रवाई में धरे गए टिकट दलालों ने अपने बयान में बताया है कि वे एक दर्जन से अधिक पर्सनल आइडी बनाकर तत्काल टिकट निकालने का काम कर रहे थे।

ज्ञात हो कि गर्मी शुरू होते ही जैसे ही शहर का पारा चढ़ने लगता है। राजधानी वासी दिल्ली, मुंबई, पंजाब, इलाहाबाद और हावड़ा की तरफ जाने वाले यात्रियों की संख्या में इजाफा हो जाता है। अचानक ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाती है, लंबी दूरी की ट्रेनों में नो रूम की स्थिति बन जाती है, जिससे यात्रियों को कंफर्म टिकट नहीं मिल पाता है। ऐसे में दलालों की चांदी हो जाती है। आरपीएफ की कार्रवाई के बाद पूछताछ में टिकट दलाल शेख जियाउल हक ने बताया कि वह अलग-अलग नामों से आधा दर्जन से अधिक फर्जी आईडी बना रखा है। अलग-अलग आइडी से तत्काल टिकट निकालने का काम कर रहे थे।

रेलवे की आइडी से बैन फर्जी आईडी से निकाल रहे टिकट

आरपीएफ ने सुंदरनगर निवासी मोबाइल क्रेजी टूर एंड ट्रेवल्स के संचालक इंदरपाल सिंह रेलवे के अधिकृत एजेंट हैं, लेकिन आरपीएफ की कार्रवाई के दौरान इनके पास 11 फर्जी आइडी मिली है। इसकी वजह है कि रेलवे द्वारा अधिकृत एजेंटों को एसी का तत्काल टिकट 10 बजे से 10-15 बजे तक बैन रहता है। वहीं स्लीपर में 11 बजे से 11.15 बजे तक बैन है, जिससे एजेंट रेलवे की आइडी से तत्काल टिकट नहीं निकाल पाते हैं। इस कारण वह फर्जी आइडी बनाकर तत्काल टिकट निकालने का काम करते हैं।

रिजर्वेशन काउंटर पर भी दलालों का रहता है दखल

अधिकारी ने बताया कि दलाल तत्काल टिकट निकालने के लिए पहले से पेपर पर अपने लोगों के नाम लिख लेता है। इससे कोई कितना भी पहले आए, उसका नाम उस लिस्ट में उनके बाद ही आता है। ऐसे में जब तक उनका नंबर आता है, टिकट वेटिंग शो करने लगता है। इससे थक-हार कर लोग उन दलालों से ही टिकट लेना बेहतर समझते हैं या फिर वे साइबर कैफै के माध्यम से टिकट निकालने वालों का सहारा लेते हैं। वहीं पड़ताल करने पर ये भी जानकारी हुई कि कुछ दलाल प्रमुख स्टेशनों की जगह पर उस स्टेशन से टिकट बुक करवाते हैं जहां ज्यादा कोटा होता है। इसके लिए उसकी बोर्डिंग को मूल स्टेशन में कन्वर्ट करवा लिया जाता है। इससे उस टिकट को बेचना आसान हो जाता है।

पर्सनल आइडी को ट्रैस करना आरपीएफ के लिए चुनौती

रायपुर रेलवे मंडल अंतर्गत टिकट दलालों पर आरपीएफ और सीआइबी की टीम नजर रखकर कार्रवाई को अंजाम देती है, लेकिन फर्जी आइडी से टिकट बुक करने वाले को पकड़ना रेलवे सुरक्षा बल के लिए कड़ी चुनौती है, क्योंकि वर्तमान में ज्यादातर लोगों के पास स्मार्ट फोन है। स्मार्ट फोन के माध्यम से वह कई फर्जी आइडी बनाकर टिकट बुक करके बेचता है। इस कारण इनको ट्रैक करना काफी मुश्किल है। पता भी नहीं लग पाता है कि कौन कहा से टिकट बुक कर रहा है।

जनवरी से अब तक 18 एजेंटों पर कार्रवाई

पर्सनल आइडी से एक व्यक्ति एक माह में सिर्फ छह टिकट ही बुक कर सकता है। यदि वह उस टिकट के मुनाफे में बेचता है तो भी वह धारा 143 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। इस धारा के तहत दस हजार जुर्माना तथा तीन साल की सजा का प्रावधान है। आरपीएफ की टीम ने रायपुर रेलवे मंडल अंतर्गत जनवरी से अब तक कुल 18 टिकट दलालों के ऊपर कार्रवाई किया है जो एजेंट आइडी की आड़ में फर्जी आईडी से निकट निकालने का काम कर रहे थे।

वर्जन

टिकट दलालों पर हमारी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। दलालों ने पूछताछ में बताया है कि वह फर्जी आइडी बनाकर टिकट निकालने का काम कर रहे थे।

अनुराग मीणा, कमांडेंड, रेलवे मंडल, रायपुर।

Posted By: Nai Dunia News Network