रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

निजी बैंकों से मिल रही कड़ी टक्कर को देखते हुए इन दिनों राष्ट्रीयकृत बैंकों को भी अपने ग्राहकों को अधिक से अधिक ऑनलाइन सुविधा से जोड़ने के लिए कहा गया है। बैंकिंग सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि जिन बैंकों में ऑनलाइन बैंकिंग वाले खातेदारों की संख्या कम है, उन्हें तो टारगेट भी दे दिया गया है कि वे ग्राहकों को अधिक संख्या में जोड़ें। इस टारगेट को पूरा करने के चक्कर में ही ग्राहकों द्वारा मांगी सुविधा भी नहीं दी जाती। इसके चलते इन दिनों बैंकों में भी ग्राहकों की सुविधाओं में बढ़ोतरी न करने के बहाने मिलते जा रहे हैं और बैंक कर्मचारी तरह-तरह के बहाने भी बना रहे हैं। इसके साथ ही क्रेडिट कार्ड के लिए भी अलग से टीम बनाई गई है, जिसके प्रतिनिधि मॉल्स में मिलते भी है और ग्राहकों इसके फायदे के बारे में जानकारी देते हैं।

इस संबंध में यूको बैंक से रिटायर्ड और छत्तीसगढ़ बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के महासचिव शिरीष नलगुंडवार का कहना है कि अगर आपके पास नेटबैंकिंग की सुविधा नहीं है तो भी बैंक को आपके द्वारा मांगी गई सुविधा देनी होगी। उपभोक्ताओं को जागरूक होना होगा और इस प्रकार की असुविधा होने पर शिकायत करनी चाहिए।

केस-1

अगर आपकी पासबुक अपडेट नहीं है और आपको उसका स्टेटमेंट चाहिए तो इस पर बैंक अधिकारी आपको सीधे सलाह देते हैं कि स्टेटमेंट लेने पर आपको प्रति पेज काफी अधिक शुल्क देना होगा। अगर इसके बाद भी स्टेटमेंट ही लेना है तो यह तत्काल आपको नहीं मिलेगा, इसमें समय लगता है। आप चाहे तो नेटबैंकिंग का फार्म रखा है, उसे भरकर जमा कर दीजिए।

केस-2

बैंकों की कुछ शाखाएं इन दिनों ऐसी हो गई हैं, जहां आप खाते खुलवाने जाते हैं तो बैंक कर्मचारी आपसे सीधे कहता है कि आप ऑनलाइन ही खाते खोलिए। अगर यहां खाते खुलवाएंगे तो बेकार ही 15 दिनों का समय लग जाएगा। इसलिए अच्छा है कि आप ऑनलाइन खाता खुलवाइए।

केस-3

अगर आप बैंक में पैसे जमा करने जाते हैं तो आपको कम राशि जमा करने के लिए बैंक के बाहर लगी कैश डिपॉजिट मशीन में जमा करने कहा जाता है और मशीन खराब है तो ग्रीन चैनल का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाएगा। ग्रीन चैनल का इस्तेमाल करने पर बैंक को ग्राहक से शुल्क भी मिलता है।