रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के बाद फर्जी जाति प्रमाण पत्र की जांच में तेजी आई है। छानबीन समिति ने पहले चरण में लंबित 115 मामलों को निपटाने का काम शुरू किया है। छह सदस्यीय कमेटी की लगातार बैठक हो रही हैं और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

उच्च प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो जाति प्रमाण पत्र की जांच के लिए अधिनियम तैयार किया गया है। इसमें जांच की एक निर्धारित प्रक्रिया है। उसे पालन किए बिना आनन-फानन में कोई भी फैसला नहीं दिया जा सकता। यही कारण है कि जाति के मामले की जांच लंबी चल रही है। प्रदेश में फर्जी जाति के 580 मामले सामने आए थे, जिसमें 245 जाति प्रमाण पत्र गलत पाए गए थे। इसमें नेताओं से लेकर पेट्रोल पंप संचालक और प्रतियोगी परीक्षा में प्रवेश लेने वाले शामिल हैं।

फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के जरिये प्रदेश में नौकरी करने वालों की संख्या सैकड़ों में है। राज्य शासन में ऐसा एक भी विभाग नहीं जहां फर्जी तरीके से नौकरी करने वाले लोग नहीं मिले। सरकार के पास जब 580 शिकायतें आई। इसमें 245 लोग फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के जरिए नौकरी करने वाले मिले हैं। इन में बहुत से लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जबकि कई लोग कोर्ट में चले गए, जिसके कारण मामला अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच पाया है।

शिक्षा विभाग में सर्वाधिक 29 प्रकरण मिले हैं। वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग में 12, उद्योग विभाग में 12, भिलाई स्टील प्लांट में 12 प्रकरण हैं। इसके साथ ही 16 प्रकरण जनप्रतिनिधियों के भी हैं। 10 मामले ऐसे पाए गए, जिसमें लोगों ने गलत जाति प्रमाण पत्र के आधार पर प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन ले लिया है। छानबीन समिति की जांच में 129 मामले फर्जी पाए गए हैं।