रायपुर। Helping Hands: सालेकसा गांव, गोंदिया महाराष्ट्र के 18 साल के रोहित का एक दुर्घटना में पैर कट गया था। इससे वह और उसका परिवार दुखी था। आर्थिक स्थिति कमजोर थी, पता चला कि रायपुर में निश्शुल्क कृत्रिम पैर लगाया जाता है। अपने परिजनों के साथ वह राजधानी पहुंचा, उसके पैरों का माप लेकर कृत्रिम पैर बनवाकर उसे लगाया गया। अब उसका परिवार खुश है, अपने नकली पैरों के सहारे ही वह जीवन में आगे बढ़ना चाहता है। उसके अलावा तीन अन्य दिव्यांगों को भी पैर लगवाया गया।

श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष बैद एवं महासचिव महेन्द्र कोचर ने बताया कि चारों दिव्यांग 18 से 40 की उम्र के हैं और दुर्धटना में अपने पैर गंवा चुके हैं। गोंदिया के रोहित के अलावा मनोहर पुरी 22 वर्ष , गजेन्द्र साहू 35 वर्ष एवं नवल किशोर 40 वर्ष को भी जयपुर पैर वितरित किया गया। कृत्रिम पैर खेमराज जैन इन्द्रावती कॉलोनी के सौजन्य से लगाया गया।

जयपुर पैर का निर्माण श्री विनय मित्र मण्डल के स्थायी वर्कशॉप पचपेड़ी नाका में किया गया। कोई भी समाजसेवी कृ़त्रिम पैर लगाने के लिए सहयोग कर सकता है, उसके परिजनों के नाम पर सेवा कार्य को दर्ज किया जाएगा।

सादगी से किया पैर वितरण

कृत्रिम पैर वितरण कार्यक्रम में समाजसेवी खेमराज जैन ने कहा कि दिव्यांगों की सेवा जीवन का सर्वोच्च कार्य है। दुर्घटनावश पैर कट जाने से जिंदगी रुक सी जाती है। युवा दिव्यांगों को पैर देकर पुनः स्वावलंबी बनाने का प्रयास जारी रहेगा। कोरोना महामारी के नियमों के चलते सादगीपूर्ण समारोह में पैर वितरण किया गया।

Posted By: Shashank.bajpai

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