रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जब बीमारियों की आफत आती है, तब नगर निगम के अधिकारियों को होश आता है। 36 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाने के लिए पांच साल पूर्व ही योजना बनाई गई थी। इसके बावजूद अभी तक 70 वार्ड की 254 बस्तियों के सर्वे तक करने में अधिकारी पीछे रह गए, जबकि इसके लिए नगरीय निकाय से भरपूर फंड भी जारी किए जा चुके हैं। ऐसे में अभी तक महज 150 किलोमीटर पुरानी पाइप लाइन बदली जा सकी है। नतीजतन हर साल गर्मी और बारिश के मौसम में घरों के नलों से गंदा पानी पीने को लोग मजबूर होते हैं। इससे 250 लोग पीलिया और 05 हजार वार्डवासी पेट संबंधी बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं। बहरहाल अभी तात्कालिक रूप से नालियों की पाइप लाइन को ऊपर करने का काम चल रहा है। वहीं पानी टंकियों की साफ-सफाई करने में जुटे हैं।

सर्वे इसलिए पीछे, ताकि पाइप लाइन की मरम्मत

वार्डों में पाइप लाइन बिछाने के लिए इसलिए भी सर्वे पीछे रहे, ताकि मरम्मत के नाम पर 70 करोड़ रुपये की राशि को खर्च कर सकें। कारण अगर पाइप लाइन बिछ गई तो मरम्मत कार्य का फंड ही रुक जाएगा। सूत्रों की मानें तो इसमें अधिकारियों और ठेकेदारों का पूरा सिंडिकेट सक्रिय है। वे अपने मनमाने तरीके से पाइप लाइन को बिछाने के काम को धीमी करने का खेल करते हैं।

गंदे पानी की शिकायतें, लेकिन जांच रिपोर्ट ही शून्य

नगर निगम के आठ जोन में करीब 1100 से अधिक शिकायतों के आवेदन आए। इसमें सभी में निराकरण की रिपोर्ट तो लगवा दी गई, लेकिन पानी की जांच शून्य ही रही। मजेदार बात है कि किसी भी वार्डवासी को उसके पानी की जांच की रिपोर्ट पीएचई कार्यालय ने उपलब्ध ही नहीं कराई।

पानी जांच की लैब एक, यहां किट ही नदारद

पीएचई के ही लैब में नगर निगम पानी की जांच करवाता है। यहां किट के सभी संसाधन नहीं होने के कारण पानी के नमूनों की जांच में दो से तीन माह लग जाते हैं। तब तक प्रभावित वार्ड के लोग बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।

फिल्टर प्लांट में खारुन नदी के पानी की जांच महज खानापूर्ति

यहां का हाल तो और अजीबो गरीब है। फिल्टर प्लांट खारुन नदी के इंटकवेल से आने वाले पानी की क्लोरिन होने के बाद जांच की जाती है। इसके बाद ही इसे शहर की सभी 34 पानी टंकियों में पानी छोड़ा जाता है। फिल्टर प्लांट पर हर एक घंटे में पानी के जांच का प्रावधान है। अगर लैब तकनीशियन नहीं है तो फर्जी तरीके से रजिस्टर पर शुद्घ पानी की रिपोर्ट लिख दी जाती है।

इन इलाकों में नालियों की पाइप लाइन बदला जाना बाकी

पुरानी बस्ती, कोटा, समता कॉलोनी, लाखे नगर, दलदल सिवनी, एकता चौक, देवेंद्र नगर, पंडरी, सड्डू, कबीर नगर, डबरीपारा, सुंदर नगर, कुशालपुर समेत ऐसे करीब 70 वार्डों के 254 इलाके हैं।

पीलिया के 250 मरीज, पांच हजार मरीज पेट संबंधी बीमारी

बीते 15 दिनों में करीब 250 पीलिया से पीड़ित मरीज हैं। इसके अलावा 5 हजार लोग पेट संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं।

वर्जन

पाइप लाइनों को बदला जाएगा। अब इस तरह की मनमानी नहीं होगी। पाइप लाइन बदलकर फिजूखर्ची पर रोक लगाने की तैयारी में जुटे है। जो आने वाले बजट पर भी दिखेगा।

- एजाज ढेबर, महापौर, रायपुर

वर्जन

पुरानी पाइप बदलने के साथ ही नई भी बिछार्इ्र जानी है। काम शुरू किया गया है।

यूके राठिया, प्रभारी अमृत मिशन, रायपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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