Jhiram Scandal Anniversary : रायपुर। छत्तीसगढ़ में हर वर्ष 25 मई को झीरम श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस संबंध में आज अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। गौरतलब है कि 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सल हिंसा में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और सुरक्षा में तैनात जवान शहीद हो गए थे। प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षा बलों के जवानों और विगत वर्षो में नक्सल हिंसा के शिकार हुए सभी लोगों की स्मृति में 25 मई को प्रतिवर्ष झीरम श्रद्धांजलि दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया गया है। इस दिन प्रदेश के सभी शासकीय और गैर शासकीय कार्यालयों में शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके साथ ही यह शपथ ली जाएगी कि राज्य को पुनः शांति का टापू बनाने के सभी मिलजुलकर संकल्प लेंगे।

गौरतलब है कि झीरमघाटी हमले को सोमवार को सात साल पूरे होने वाले हैं। इस हादसे ने सबको झकझोर कर रख दिया था। 25 मई 2013 की शाम को हुए इस हमले में 32 लोगों की जानें गई थी। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा माओवादी हमला था। यह हमला बस्तर जिले के दरभा इलाके के झीरम घाटी में कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा पर हुआ था। इस हमले को कांग्रेस ने सुपारी किलिंग करार दिया। इसकी जांच जारी है।

यह है झीरम घाटी की दर्दनाक कहानी

25 मई 2013, शाम करीब 5 बजे का समय था। भीषण गर्मी के बीच लोग अपने घरों और कार्यालयों में पंखे-कूलर की हवा के नीचे बैठे थे। इसी बीच अचानक टीवी पर एक खबर आई। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के झीरम घाटी में करीब डेढ़ घंटे पहले एक माओवादी हमला हुआ था। यूं तो यहां आज भी रोजाना माओवादी हिंसा होती है, लेकिन यह घटना उन घटनाओं से कहीं अधिक खौफनाक और भीषण थी।

प्रारंभिक खबर आने के करीब 15 मिनट बाद अपडेट खबर आई। इस खबर में बताया गया कि माओवादी हमले में बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर कांग्रेसी नेता महेन्द्र कर्मा और तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष कांग्रेस नंद कुमार पटेल सहित कई लोग मारे गए हैं। विद्याचरण शुक्ल की हालत गंभीर है। इसके बाद धीरे-धीरे खबर का दायरा बढ़ने लगा। रात करीब 10 बजे जब यह जानकारी आई कि हमले में कुल 32 लोग मारे गए हैं, तो लोगों को इस खबर पर भरोसा कर पाना मुश्किल हो रहा था।

एक-एक कर घटना में मारे गए लोगों के नाम सामने आने लगे। इनमें वे नाम थे जो उस वक्त छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के पहली कतार के नेता थे। यह देश के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा नक्सल हमला था। इस हमले की सातवीं बरसी सोमवार को मनाई जाएगी। घटना को भले ही 6 साल हो गए, लेकिन इसके जख्म आज भी पूरी तरह ताजा हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दिवंगत नेताओं की शहादत को चिरस्थाई बनाने के लिए छत्तीसगढ़ में हर साल 25 मई को झीरम श्रद्धांजलि दिवस मनाने का निश्चय किया है।

Posted By: Anandram Sahu

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