रायपुर ( नईदुनिया प्रतिनिधि ) । Kidney Patients In Chhattisgarh: राजधानी के शासकीय डीकेएस सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल की ओपीडी में पहुंचने वाले किडनी के नए रोगियों में 40 फीसद युवा हैं। इन युवाओं में किडनी की बढ़ती समस्या से चिकित्सक भी हैरान हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य तौर पर किडनी की समस्या 40 वर्ष के बाद आती है। रक्तचाप और मधुमेह (बीपी-शुगर) के मरीजों में यह बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है, लेकिन हाल में देखा जा रहा है कि 15 से 35 वर्ष के ऐसे युवा जिनको बीपी-शुगर की शिकायत नहीं है उन्हें भी किडनी से संबंधित परेशानी आ रही है।

नई चुनौतियों का सामना करने के लिए विशेषज्ञ शोध की तैयारी में लगे हैं। ताकि सही तरीके से इलाज हो सके। मानव संसाधन की कमी इसमें रोड़ा साबित हो रही है। किडनी रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा. प्रफुल्ल दावले ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में हर दिन प्रदेश भर से 50 से 60 मरीज पहुंचते हैं। इसमें 40 फीसद युवा हैं जिन्हें अन्य स्वास्थ्यगत समस्याएं नहीं होती है। वहीं अस्पताल में 100 से अधिक मरीजों का हर दिन डायलिसिस होता है। अधिकांश मरीजों की किडनियां इतनी खराब हो जातीं हैं कि उनके ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ रही।

20 जिलों में नहीं डायलिसिस की सुविधा

बता दें राष्ट्रीय निश्शुल्क डायलिसिस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के सिर्फ सभी जिला अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा शुरू करनी है। लेकिन अब तक सिर्फ आठ जिलों में ही डायलिसिस केंद्र शुरू हुए हैं। इनमें दुर्ग, कांकेर, कोरबा, बिलासपुर, महासमुंद, बीजापुर, जशपुर और सरगुजा आदि शामिल हैं। वहीं जिला स्तर पर किडनी बीमारी के रोगियों के लिए जांच व स्क्रीनिंग की सुविधा नहीं होना भी समस्या को बढ़ावा दे रहा है।

राष्ट्रीय डायलिसिल कार्यक्रम में आठ जिलों में हुए सेशन

जिला स्क्रीनिंग

बीपी-शुगर को लेकर सर्वे की स्थिति

डीकेएस सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के विभागाध्यक्ष (किडनी रोग विभाग) डा. प्रफुल्ल दावले ने कहा कि किडनी रोग विभाग की ओपीडी में आ रहे 40 फीसद युवाओं में किडनी की समस्या सामने आ रही है। ज्यादातर मामले में इन युवाओं को बीपी और शुगर की परेशानी नहीं है। ऐसे में इसे लेकर शोध की आवश्यकता है। लेकिन संसाधन की कमी की वजह से समस्या आ रही, शोध जल्द शुरू करेंगे। ताकि मुख्य कारण जान सकें।

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