असीम सेनगुप्ता, अंबिकापुर । आदिवासी नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय लरंग साय के गृहग्राम यशवंतपुर को केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने गोद लिया है। शंकरगढ़ जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत चिरई के आश्रित गांव यशवंतपुर में अभी तक बेहतर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय लरंग साय, पूर्व विधायक अमीन साय का गृह ग्राम होने के बावजूद इस गांव में मूलभूत सुविधाओं की आज भी कमी खलती है।

इस गांव को अब सांसद आदर्श गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। इस बहाने सरगुजा को भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले काका लरंग साय को श्रद्घांजलि देने का प्रयास है। केंद्रीय राज्यमंत्री रेणुका सिंह के इस कदम की सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिले के भाजपाइयों ने स्वागत और सराहना की है।

एकदम अलग था जीने का अंदाज

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय लरंग साय की पहचान एक तेजतर्रार और प्रखर नेता के रूप में भाजपा संगठन में होती थी। उनका जीने का अंदाज एकदम अलग था। अपनी सादगी और स्पष्टवादिता के चलते काका लरंग साय पूरे सरगुजा में आम जनता के बीच काफी लोकप्रिय थे। उन्हीं के प्रयास से अम्बिकापुर तक रेल लाइन पहुंच पाई थी।

इसके लिए उन्होंने लंबा आंदोलन चलाया था। केंद्रीय राज्य मंत्री बनने के बावजूद वे अपने गांव और जमीन से जुड़े रहे। तामझाम की राजनीति से दूर खुद के खेतों पर हल बैल से जोताई करने में भी वे कभी पीछे नहीं रहे। उनका यही ठेठ सरगुजिया अंदाज आज भी सरगुजा वासियों के दिलों दिमाग पर छाया हुआ है। सांसद पद पर होने के दौरान भी वे रिक्शे पर बैठकर अम्बिकापुर शहर की सड़कों में घूमते नजर आते थे।

कभी नहीं की स्वार्थ की राजनीति

राष्ट्रीय स्तर के भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ आत्मीय संबंध और केंद्र सरकार का हिस्सा बनने के बावजूद काका लरंग साय ने आज के राजनेताओं के समान राजनीति नहीं की। गांव और जमीन से जुड़े रहने के कारण उनकी अलग छवि आज भी बरकरार है। उन्होंने कभी स्वार्थ की राजनीति नहीं की और ना ही अपने गांव और पंचायत, विकासखंड को तरजीह दिया।

वे पूरे सरगुजा संसदीय क्षेत्र को एक समान भाव से देखते थे। उनके निधन के बाद अंबिकापुर शहर में उनके नाम से चौक का नामकरण किया गया और प्रतिमा रखी गई। वे एक ऐसे राजनेता थे जिनके जीते जी रामानुजगंज में प्रतिमा लगा दी गई थी। इसके पीछे वजह थी कि अविभाजित मध्य प्रदेश के जमाने में बिहार वर्तमान झारखंड को जोड़ने के लिए कनहर नदी पर पुल निर्माण उन्हीं के प्रयासों से हुआ था।

ट्रेन में उनके नाम पर होती थी दिल्ली की सीधी बोगी

बिश्रामपुर से अनूपपुर तक जाने वाली ट्रेन में उनके नाम से ट्रेन की बोगी जुड़ा करती थी और अनूपपुर से वह बोगी सीधे नई दिल्ली जाने वाली ट्रेन में जुड़ जाया करती थी। उनके निधन के साथ ही यह सुविधा भी बंद हो गई। उस दौर में सरगुजा की उम्मीदों, आकांक्षाओं पर खरा उतरने वाले काका लरंग साय को निधन के बाद सत्ता और संगठन की ओर से वह स्थान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे, लेकिन वर्तमान सरगुजा सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने उनका पुण्य स्मरण करते हुए उनके ग्राम पंचायत चिरई को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया है।

काका के गांव में नजर आती है उनके व्यक्तित्व की सादगी

काका लरंग साय के गांव जसवंतपुर में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, लेकिन इस गांव में उनके व्यक्तित्व की सादगी आज भी नजर आती है। सीधे-सादे और सरल लोगों के इस गांव में लोगों के बीच आपसी रिश्ते और प्रेम की भावना काफी मजबूत है। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए सांसद आदर्श ग्राम के रूप में इस गांव का चयन होने के बाद अब यहां बुनियादी सुविधाओं के विकास की उम्मीद नजर आने लगी है।

Posted By: Nai Dunia News Network