Life Management : रायपुर। जीवन ईश्वर का दिया हुआ अनुपम उपहार है। इसे यूं ही बर्बाद नहीं करें। जीवन के हर पल को मौज से जीएं और जो मुश्किलें आती हैं, उन्हें ठोकरें मारते चलें। अगर कभी आपको कोई समस्या ज्यादा सताने लगे तो उसे अपने करीबी लोगों से चर्चा कर तनावमुक्त हो जाएं। स्ट्रैस यानी तनाव को जाहिर करें, उसे पाले नहीं। स्ट्रैस पालने से वह और भी ज्यादा बढ़ती जाती है। एक समय ऐसा भी आता है, जब आपको आगे कुछ और दिखाई नहीं देता, और जीवन के अंत का मन में विचार आने लगता है। इसलिए जिंदगी में जब भी कोई स्ट्रैस आए तो उसे अपने परिवार, मित्र और अपने कांसलर को बताएं और उससे तुरंत बाहर आने की कोशिश करें। यह बातें एनआइटी में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार 'लाइफ इज ब्यूटीफुल" में विशेषज्ञों ने कहा।

एनआइटी रायपुर के छात्रों के लिए भावनात्मक कल्याण समर्थन के लिए सेमीनार का आयोजन हुआ। इसका आगाज गुरुवार 23 जनवरी को हुआ , यह 24 जनवरी तक चला । कार्यशाला के प्रथम दिन एनआइटी के डायरेक्टर डॉ. एएम रवाणी ने 'जब तक जीवन है, तब तक संघर्ष है और जब तक संघर्ष है, तब तक जीवन है" विषय पर अपनी बात रखी।

डॉ. रवाणी ने कहा कि जीवन का असली मतलब ही संघर्ष है। सभी के जीवन में अच्छा और बुरा दोनों समय आता है, जो अस्थायी होता है। जैसे लोग अपने अच्छे समय में खुश होते हैं और उसका भरपूर आनंद लेते हैं। ठीक उसी तरह लोगों को अपने कठिन समय को भी आनंददायक बनाना चाहिए और उस परेशानी का सामना कर समाधान निकालना चाहिए।

उन्होंने छात्रों से चर्चा करते हुए कहा कि परीक्षा पास करना, नौकरी पाना, पदोन्न्ति प्राप्त करना संघर्ष है, लेकिन स्मार्ट वर्क की मदद से सब कुछ संभव है। वहीं कार्यशाला के अंतिम सत्र में डॉ. अजीत वरवंडकर द्वारा 'हैप्पीनेस इन लाइफ" विषय पर चर्चा की। कार्यक्रम डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. प्रभात दीवान और एसोसिएट डीन एस डब्ल्यू डॉ.नितिन जैन के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

जीवन जीने का मकसद ढूंढें

डॉ. समीर बाजपेयी ने 'वैल्यू एजुकेशन" पर छात्रों से चर्चा करते हुए कहा कि व्यक्ति और समाज की गरिमा के लिए सम्मान विकसित करना, देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना का प्रसार, सोच और जीने का लोकतांत्रिक तरीका विकसित करना ही तनाव मुक्त जीवन जीने में कारगर साबित होता है। हमें अपने आप में जीने का मकसद ढ़ूंढ़ना होगा। अगर हमारा मकसद साफ है तो हम अपने जीवन से कभी हार नहीं मान सकते हैं। जीवन में आने वाली समस्याओं का डटकर सामना करेंगे और आगे बढ़ते जाएंगे।

पैरेंट्स अपने बच्चों से हर समस्या पर करें बात

सेमिनार में डॉ. हिना चावड़ा काउंसलर एनआइटी रायपुर ने छात्रों की समस्याओं पर बात करते हुए कहा कि छात्र जीवन में कई समस्याएं आती है। जिससे छात्र डिप्रेशन और स्ट्रैस पाल सकता है। लेकिन छात्रों को ऐसा कभी नहीं करना चाहिए। जो समस्याएं आती हैं, उन्हें अपने दोस्तांे, शिक्षकों और पैरेंट्स से शेयर कर लेना चाहिए।

इससे ज्यादातर मुश्किलें हल हो जाती हैं। वहीं उन्होंने कहा कि छात्रों के पैरेंट्स की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने बच्चे से हमेशा बात करें और उनकी समस्या को पैरेंट्स नहीं, दोस्त बनकर सुनें और हल करें। वहीं उन्होंने छात्रों को मेडिकल थैरेपी द्वारा मूड स्विंग्स और बाइपोलर डिसऑर्डर जैसे बीमारियों से कैसे निजात पाया जा सकता है, इसके बारे में भी बताया।

Posted By: Anandram Sahu

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